नारी ज्योति व ज्वाला...
दो प्रकार के नारी होती है, एक सुघड़ आदर्श नारी और फूहड़ नारी, सुघड़ नारी अपनी सहनशीलता, विवेक, धैर्य, संयम, मधुर भाषा � read more >>
"सती" जिसका नाम सुनते ही रूह काँप जाती है, बदन का रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो जाता है, दिल में एक अलग तरह की सनसनी पैदा हो जाती है, हम यह सोच भी नहीं read more >>
फितरत...
इन्सान की फितरत है कभी नहीं बदलती है
वक्त के साथ लोग बदल जाते है
चूहा पत्थर का हो लोग पूजा करते है जिंदा हो तो बिना मारे दम नहीं � read more >>