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गीत
डालो बदल कुरीति को
चाहत अनुपम जब रखें,कुछ तो हो बदलाव। डालो बदल कुरीति को, रखें सदा सद्भाव।। छोड़ें मत अधिकार,छीन लें अपने हकको। बनकर दिव्य मिशाल,सीख दे�
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गलती भी हो माफ-अब शान्ति खुशी हो साथ
कुछ तो हो बदलाव अब,जब हो भला विचार। दुनिया सुन्दर अति लगे, जन्मे खाली प्यार।। कुछ तो हो बदलाव अब,रखें नजर को साफ। अच्छा ही तब सब दिखे,ग�
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रखें सदा विश्वास- खुशियां तब हो पास
करना पड़ता त्याग है, खुशियां तब हो पास। ढूँढे से मिलता नहीं,जल्दी कुछ भी खास।। जल्दी कुछ भी खास,लगन से ही है मिलता। रखें सदा विश्वास,फू
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त्याग रहो आलस्य को-धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार
धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार। त्याग रहो आलस्य को, हो अनुपम किरदार।। हो अनुपम किरदार,करे संसार प्रसंशा। बढ़ते आगे आप,पूर्ण होगी
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धीरे धीरे हो रहा-अंशुमान अब गर्म
धीरे धीरे हो रहा, अंशुमान अब गर्म। भक्ति भाव में सब रहें,छोड़ें कभी न धर्म।। धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार। त्याग रहो आलस्य को, ह�
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अनुपम हो आगाज-लेखन ऐसा कीजिए
लेखन ऐसा कीजिए,अनुपम हो आगाज। करे नाश पाखंड को,लोगों की आवाज।। लोगों की आवाज,करे भारत को आगे। प्यारा अपना देश,रहे दुख गम सब भागे।। जन �
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बहादुर कभी संघर्ष से डरते नहीं है
क्यों रोती है तू तेरी आंखों में आंसू जचते नहीं है दर्द हो ना जिसे वह कभी इतिहास रचते नहीं है सह ना सके जो पत्थर चोट हथौड़ी के वह कभ�
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बैर- कूट और हिंसा छाई पूरे जहान में
कैसी ये दुनिया बनाली देखो इंसान ने, बैरकुट् और हिंसा छाई पूरे जहान में। दौलत के खातिर देखो लड़ते परिवार में, बैर-कूट और हिंसा छाई पूर�
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प्रेम की राह के बंध खुल जाएंगे
मेरी आँखें हैं पथराई, रीता हृदय कितना सूना है रस्ता तुम्हारा प्रिये यूं तो सारा जहां है हमारा मगर कितना मुश्किल है पाना सहारा प्र�
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तुझे प्यार नजाने क्यों हुआ है
तुझे प्यार नजाने क्यों हुआ है। 2....2 इतनी समझ तो नहीं ।......अ नादान उम्र.....फिर मुश्किल सफर ,तुने ये चूना हे। तूझे......... अब दूआओँ की जरूरत है।
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खुद को तुम अति योग्य कर
माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समाँ रौशन तब रहता। छोड़ें कभी न आस,ज्ञान यह ही
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मायावी संसार है सबका अपना दाम
मायावी संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। मायावी संसार है,गुर सब ले ले यार। और बता दे ज्ञान से,करना सबको
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