[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
कविताएँ
Home
Category
कविताएँ
जिक्र भी होगा और फिक्र भी होगा
ज़िक्र भी होगा तुम्हरा ,फ़िक्र भी होगा तुम्हारा जिस दिन माँ न होगी घर मे,वो घर भी मंदिर ना होगा तुम्हारा ये जो करीब का रिश्ता ,गरीब
read more >>
कास मेरा जन्म एक पंछी जेसा होता
कास मेरा जन्म एक पंछी जेसा होता/ में भी आसमान मे उड पाता तो इस दुनिया की नस्वर्ता को देख पाता, कास मेरा जन्म एक पंछी जेसा होता/ कभी इस
read more >>
वहाँ मेरा श्याम नजर आता हे
जहाँ ना कोई उम्मीद का सहारा नजर आता हे वहाँ दिल बड़ा घबराता हे एक पल याद करूँ तू वहाँ मेरा श्याम नजर आता हे/
read more >>
मुसाफिर तुम वादे हजार मत करना
प्रण जो ले लिया इस झूँठ की दुनिया में मुसाफिर तुम वादे हजार मत करना/ जीवन हो जाये कठपुतली जेसा फिर भी सपनों का सोदा मत करना, भावनाए
read more >>
प्रकृति अनुपम कृति हैं-यह इसकी पहचान है
प्रकृति अनुपम कृति हैं, यह इसकी पहचान है। कहीं पेड़ों की छांव में, पक्षी बैठे शान्त से कहीं अपनी चोंच खोले, ध्वनि करते आन से। कहीं बरसा
read more >>
समाज
ये समाज एक तेज तलवार है इसमें जीत भी हार है। इंसानियत तो अब कही है ही नहीं हर तरफ बस लोगों में तकरार है ये लोग जो हैं बड़े होते बेरहम ह�
read more >>
शीर्षक (पिता)
शीर्षक (पिता) मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर माँ का प्यार तो तुमको याद रहा। क्या पिता का प्यार तुम भूल गये। एक पिता को समझना आसान नही पि�
read more >>
पहुंच
चांद तू क्या था, क्या हो गया? भारी- भरकम पेड़, बुढ़िया सरसर सूत कातती। बैठी बूढ़ी आंखों से, जवां जहां को ताकती। बच्चों को बहलाती मां, चा�
read more >>
तेरे संग मेरे यारा
लिखती और गुनगुनाती जा रही हूँ हसीन कहानियाँ तेरे संग मेरे यारा याद आ रहे हैं वह पल जब दुल्हन बनाई थी घर संग तेरे मेरे यारा दुःख-सुख ह�
read more >>
जीवन- संध्या
सही- गलत, गर्हित , सहल हो लिए साथ। मूसलधार हो रही, छल-छंद की बरसात। कठिनाइयां कह रही, तू डाल मैं पात। अवसर तुझसे कह रहे, नाप तेरी औक़ात। छ�
read more >>
आया फिरंगी आया
आया फिरंगi आया, लूटा दोनो हाथों से ।। तब आई लक्ष्मी बाई, स्वतंत्रता की पहली चिंगारी थी उसी ने जलाई। मंगल पांडे ने प्रथम स्वतंत्रता सैन
read more >>
Dada g
आज मेरे अपने मेरे खिलाफ खड़े है। पर, मेरे दादाजी के संस्कार मेरे साथ खड़े है। आज जब मै पिछे मुड़कर देखता हूँ तो बचपन के वो हसिन दिन दादा क�
read more >>
« Previous
Next »
Showing
5557
to
5568
of
6966
results
‹
1
2
...
461
462
463
464
465
466
467
...
580
581
›
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder