अंजली कुमारी 26 Jul 2024 कविताएँ अन्य 25047 0 Hindi :: हिंदी
समय ,क्यों है तुझको इती जल्दी? तुम भी थोड़ा विश्राम क्यों, तुम भी थोड़ा आराम करो, सतत चलते रहते हो तुम, कठोर परिश्रम करते रहते हो तुम। मैं हूं जग में अनोखी वस्तु, मैं न रूकता, मैं न झुकता। मैं न कभी विश्राम करता, मैं हूं चलाता पूरे जग को। मैं ही इंसानों को पश्चाताप कराता, मेरे तिपहिये गाड़ी से मैं, दुनिया को हूं सतत चलाता। कठोर परिश्रम का पाठ पढ़ाता। एड़ी-चोटी का जो जोर लगाता, मैं हूं उसे सफलता तक पहुंचाता। इसीलिए तो मैं हूं जग में श्रेष्ठ कहलाता।।