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“पीडा ने”-अभिषेक कोलेशर

           "पीडा ने"

पर्वत का सा रूप लिया है पीडा ने
दैत्य सदृश आकार लिया है पीड़ा ने
पुण्य धरा को झकझोर दिया है पीड़ा ने
शेषफनों को हिला दिया है पीडा ने
कोलाहल सा मचा दिया है पीड़ा ने
घर के अंदर कैद किया है पीडा ने
रवि आभा को लुप्त किया है पीडा ने
अंधकार का साथ दिया है पीडा ने
घोर तिमिर को बढ़ा दिया है पीडा ने
शशि कलंक को बृहद किया है पीड़ा ने
तारों को बेहाल किया है पीडा ने
सागर जल को सुखा दिया है पीडा ने
नदियों को बहने से रोका पीडा ने
दसों दिशाओं को घेरा है पीडा ने
पशु पक्षियों के प्राण हरें हैं पीडा ने
फूलों को भी रुला दिया है पीडा ने
पौधों को भी सुखा दिया है पीडा ने
बेमौसम सब कुछ करवाया पीड़ा ने
बेलों की हरियाली छीनी पीडा ने
प्रकृति से खिलवाड़ किया है पीड़ा ने
दारूण दुख उपहार दिया है पीड़ा ने
जीव जगत को त्रास दिया है पीड़ा ने
संतापो की झड़ी लगा दी पीडा ने
कितने पेटों को लात मार दी पीड़ा ने
कितनों की आशाएं छीनी पीड़ा ने
कितने सपनों को खा डाला पीड़ा ने
कितनों को निर्धन कर डाला पीडा ने
कितनों को पागल कर डाला पीड़ा ने
कितनों को बेघर कर डाला पीड़ा ने
कितनों के ही प्राण हर लिए पीडा ने
कितनों की ही लाठी तोड़ी पीड़ा ने
कितनों की बैसाखी छीनी पीड़ा ने
कितनों को लाचार कर दिया पीड़ा ने
कितनों को घायल कर डाला पीड़ा ने
कितनों के घर में आग लगाई पीडा ने
कितनों का सब कुछ छीना है पीडा ने
विध्वंस और आतंक मचाया पीड़ा ने
धरती में कंपन कर डाला पीड़ा ने
राहों को सुनसान कर दिया पीडा ने
अर्थव्यवस्था को खा डाला पीडा ने
एक सदी पीछे कर डाला पीडा ने
लक्ष्यों को धुंधला कर डाला पीडा ने
यह कैसा विध्वंस मचाया पीडा ने
संपूर्ण विश्व को ग्रहण लगाया पीड़ा ने
जनजीवन पर घात लगाया पीड़ा ने
श्वशन तंत्र को ग्रास बनाया पीड़ा ने
माताओं की कोख छीन ली पीड़ा ने
जलते चूल्हो में जल डाला पीड़ा ने
दाने-दाने को मोहताज कर दिया पीड़ा ने
मजदूरों को मजबूर कर दिया पीड़ा ने
मजबूरों को क्रुद्ध किया है पीड़ा ने
बेबस और लाचार किया है पीडा ने
लाचारी के चित्र निकालें पीडा ने
गरीबी का उपहास कराया पीडा ने
नेताओं के घर भर डाले पीडा ने
संतापों से त्रस्त किया है पीड़ा ने
नंगे पैरों से दौड़ाया पीडा ने
चटनी रोटी में सेंध लगाई पीडा ने
कालाबाजारी को दिया बढ़ावा पीड़ा ने
राहों में ही प्रसव कराया पीड़ा ने
संपूर्ण विश्व घुटनों पर टेका पीडा ने
क्रंदन ही क्रंदन करवाया पीड़ा ने
कितनो की आशाएं छीनी पीडा ने
भय ही भय बस व्याप्त किया है पीड़ा ने

हम इससे भयभीत हो गए यह सोचा है पीडा ने
आतंकित हो गए सभी यह सोचा है पीड़ा ने
सामर्थ्य हमारा अभी नहीं देखा है पीडा ने
दीपक से तम को हर लेंगे नहीं सोचा है पीडा ने

(बहरहाल यह सब कुछ नया नहीं है यह तो अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचारी तंत्र,
नेता एवं मंत्रियों के द्वारा किया ही जा रहा था जो इस पीड़ा से भी बड़ा संकट
है जिन्होंने केवल लूटा ही लुटा , दिया कुछ नहीं । परंतु इस पीड़ा ने बहुत कुछ
छीना है तो दिया भी बहुत कुछ है!)

जीवन की भाषा बतलाई पीडा ने
जीवन की कीमत बतलाई पीडा ने
जीने की है राह बताई पीडा ने
जीने की है कला सिखाई पीड़ा ने
कई सपने साकार कर दिए पीड़ा ने
स्वच्छता का पाठ पढ़ाया पीड़ा ने
पर्यावरण को स्वच्छ बनाया पीडा ने
नदियों का जल शुद्ध बनाया पीडा ने
वायु को भी स्वच्छ कर दिया पीडा ने
सारे दोषों से मुक्त किया है पीड़ा ने
ओजोन परत में जान डाल दी पीड़ा ने
पारिस्थितिकी संतुलन करवाया पीड़ा ने
स्वावलंबन की शिक्षा दे दी पीडा ने
इंसानियत का पाठ पढ़ाया पीड़ा ने
आत्मनिर्भरता का ज्ञान सिखाया पीड़ा ने
अंधविश्वास को मिटा दिया है पीड़ा ने
पाखंडो को ध्वस्त किया है पीड़ा ने
सच्चे ईश्वर की छवि दिखा दी पीड़ा ने
देशद्रोहियों को नंगा कर डाला पीड़ा ने
उनको ले तालों में डाला पीड़ा ने
संस्कृति को याद दिलाया पीड़ा ने
धैर्य और संयम सिखलाया पीडा ने
‘होती है क्या कैद’ बताया पीड़ा ने
पाश्चात्यता को लात मार दी पीड़ा ने
पश्चिम को औकात दिखा दी पीड़ा ने
मादक द्रव्यो पर रोक लगा दी पीडा ने
भारत को हनुमान बनाया पीडा ने
नमस्कार को धर्म बताया पीड़ा ने
फिर से वेदों में लौटाया पीड़ा ने
भारतीय संस्कृति को सिद्ध कर दिया पीडा ने

  ✍️सनाढ्य अभिषेक कोलेश्वर 
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