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ईश्वर से बडा़ कोई नहीं-अर्चिता-प्रिया

एक बार नदी और वृक्ष में बहस हो गई ……
नदी ने कहा कि “””मैं जीवनदायिनी हूं , जो प्राणी मात्र को जीवन देती हूं , निरंतर बहती रहती हूं ,,,,जल जीवो को भी पनाह देती हूं और सब के जीवन की रक्षा भी करती हैं,,,,, तो मुझसे बड़ा कोई नहीं है ।मेरे बिना तो कोई जीवित ही नहीं रह सकता है ,,,,मैं सब के जीवन के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हूं “””‘

वृक्ष ने भी कहा “””मैं ही जीवन दाता हूं ,,,छाया भी देता हूं ,,,फल भी देता हूं ,,,इंधन भी देता हूं ,,,,मुझसे लोग अपने घर भी बनाते हैं ,,,,,परिंदों को मैं आश्रय भी देता हूं । मैं अगर ना रहूं तो आदमी ठंड में मर जाएगा ,,,,धूप में जल जाएगा,,, बिना फल और हवा के वह जीवित नहीं रह पाएगा “”””।

कुछ दूर पर भगवान सब सुन रहे थे …
ईश्वर को तो अपनी बनाए प्रकृति का अहम भी स्वीकार नहीं होता है ।
उन्होंने सोचा कि … मेरी बनाई हुई दुनिया से ये लोग अपने आप घमंड में जी रहे हैं ।

इतनी तपी धरती की नदी सूख गई ,,,,
वृक्ष भी मुरझा गया ,,,,।
बारिश भी इतनी अधिक हो गई कि बाढ़ आने से नदियों का स्वरूप बिगड़ गया ,,,,,
आंधी इतनी तेज और भयंकर आई कि वृक्ष का वजूद उखड गया ,,,,
सारी सृष्टि तहस-नहस हो गई ।

तात्पर्य कि “”जिस निर्मित से ईश्वर ने हम को बनाया है उन्हीं कार्यों को करते हुए ईश्वर का धन्यवाद देना चाहिए “””।

शिक्षा इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि अगर भगवान ने आपको उस लायक बनाया है कि आप किसी की मदद कर सकते हैं तो जरूर कीजिए ।।लेकिन खुद पर घमंड मत कीजिए कि मैं किसी का जीवन दाता हूं या मैं किसी का मृत्युदाता हूं ,,,, क्योंकि सबसे ऊपर वो ऊपर वाला है,,,, इसलिए ईश्वर से बड़ा और शक्तिशाली कोई नहीं है ।।

ओम शांति दोस्तों
धन्यवाद दोस्तों 🙏🙏💐

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