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प्रसन्नता से नाताःः

प्रसन्नता से नाताःः
भागमभाग भरी जिंदगी में प्रसन्नता दूर छिटकती जा रही है। व्यस्तता की वजह से लोगों के मुख से हंसी-खुशी छीन-सी गई है। जीवन तनावपूर्ण हो गया है। यही कारण है कि हम प्रसन्नता को महसूस नहीं कर पा रहे हैं। वह दबे पांव आती भी है, तो हम उसको पहचान नहीं पा रहे हैं और अनमने से उसको निकल जाने दे रहे हैं।
प्रसन्नता हमारे पास इन माध्यमों से आ रही है। लक्ष्यों को टुकड़ों में बांटकर हासिल करने से, बच्चों की उपलब्धियों से, निकट के नातेदारों व पड़ोसियों से सुख-दुःख बांटने से, बड़ो का स्नेह व छोटों का सम्मान पाने से, जरूरतमंदों की मदद कर उनका आशीर्वाद लेने से और अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने से। अतएव, प्रसन्नता प्राप्ति के उन कारकों पर विचार करते रहना चाहिए, जिनसे हमारा निकट का रिश्ता-नाता है।
लक्ष्य हो टिकाऊः जीवन को प्रसन्नतापूर्वक जीने के लिए हर इंसान का एक मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। मुख्य लक्ष्य चूंकि एक-दो साल में हासिल नहीं होते, इसलिए मुख्य लक्ष्य को टुकड़ों में बांट देना चाहिए। बंटा हुआ यह लक्ष्य सिलसिलेवार हो, तो अच्छा हुआ करता है। यदि इसमें एकाध की भी प्राप्ति हो जाती है, तो मन तसल्ली से भर उठता है। इसके बाद शेष लक्ष्य को पाने के लिए संकल्पित होकर, टिककर और डटकर काम करना चाहिए। उसकी प्राप्ति के लिए भरसक प्रयास करना चाहिए। इससे जो प्राप्ति होगी, इससे बढ़कर कोई खुशी इस जहां में हो नहीं सकती।
कभी-कभी यह भी हो सकता है कि लक्ष्य प्राप्ति में विलंब हो। क्योंकि काम करना हमारे हाथ में होता है, कार्य की सफलता हमारे वश में नहीं। सफलता के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं। इसलिए धैर्यपूर्वक काम करते रहना चाहिए। आपका संकल्प और कार्य की गुणवत्ता दूसरों को भी आपकी ओर देखने के लिए मजबूर करती है। जब आप ही उस पर अडिग नहीं रहेंगे, तो दूसरों से कैसे उम्मीद करेंगे कि वे आपके कार्यों को प्रमोट करे? उसकी प्रशंसा करंे।
काम का आनंदः अपने काम को पसंद करना और उसमें खुशी महसूस करना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। जो लोग अपने काम को खुशी-खुशी करते हैं, उनकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है। आप अपने काम से प्रेम करते हैं और उत्साह सहित हर गतिविधि में भाग लेते हैं, तो आप अपनी सफलता स्वमेव सुनिश्चित कर लेते हैं। इसके विपरीत आपका मन डांवाडोल रहता है, तो आपके काम का स्तर घटता चला जाता है। उसमें मीनमेख निकलता है। उसकी स्वीकार्यता घट जाती है। इसलिए खुश रहने की शर्त यही है कि अपने काम को पसंद कर काम का आनंद लेते रहें।
लोगों की उपलब्धि पर गर्वः बच्चे हमारे जीवन के अनमोल धरोहर हैं। उनकी खुशी में अपनी खुशी तलाशना चाहिए। पढ़ाई में उनका अच्छे अंक लाना, खेलकूद में ऊंचाइयां प्राप्त करना और अच्छे जाब में पदार्पण करना, ऐसी खुशियां हैं, जिन पर हर माता-पिता को गर्वानुभूति होती है। यदि उनकी सफलता में माता-पिता खुश नहीं होगें, तो जाहिर-सी बात है कि पड़ोसी या रिश्तेदार खुश नहीं होंगे। अगर दूसरे खुश होते भी हैं, तो उनकी खुशी बनावटी व क्षणभंगुर होती है। अतः, बच्चों की खुशी में अपनी खुशी तलाशिए। ऐसे अवसरों को स्थायी प्रसन्नता में बदलिए। उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय गुजारिए। यह रीति आपकी प्रसन्नता को द्विगुणित करेगा। इसी तरह नातेदारों व पड़ोसियों से भी निकटता रखिए। उनका आनंद, आपका आनंद हो जाएगा। आशय यह कि कार्य और जीवन के बीच संतुलन साधने से प्रसन्नता द्विगुणित होती जाती है।
दूसरों की मददः दूसरों की मदद कई तरह से की जा सकती है। कापी-किताब देना, कपड़े-लत्ते देना, स्कूल व कालेज की फीस अदा करना, आर्थिक मदद करना, सहयोग या सहायता का हाथ बढ़ाना, स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सलाह देना, पड़ोसियों को मानसिक शांति प्रदान करना आदि कुछेक तरीकें हैं। आप चाहे तो इससे बढ़कर कोई न्यास भी बना सकते हैं, जिसमें गरीब बच्चों की पढ़ाई, वृद्धों की सहायता और गरीबों की मदद का कार्यक्रम चला सकते हैं। खेलकूद के क्षेत्र में भी दूसरों की मदद कर उनके लक्ष्य प्राप्ति के लिए काम किया जा सकता है। यकीन मानिए। इससे आपकी प्रसन्नता का ओर-छोर नहीं रहेगा।
बेहतर स्वास्थ्यः स्वास्थ्य को बेहतर रखना हम सबका प्राथमिक दायित्व है। यह पूरी तरह इंसान के अपने हाथ में है। इसके लिए हम जागिंग, वाकिंग, खेलकूद, व्यायाम, योग व प्राणायाम का सहारा ले सकते हैं। इससे क्रानिक डिप्रेशन का खात्मा होता है। मस्तिष्क उन्नत होकर सिरेटोनिन का स्त्रावण करता है, जो पूरा तन-मन बेहतर महसूस करता है। व्यायाम से एंडोर्फिंग का स्तर बढ़ता है, जो मूड को तरोताजा रखता है। इससे तनाव पर काबू पाया जा कसता है। तनावरहित जीवन प्रसन्नता का वाहक ही तो है।
उपसंहारः उपर्युक्त तरीकों के अलावा हमें अपनेआप से सवाल भी करते रहना चाहिए कि ‘‘क्या वे खुश हैं?’’ ‘‘कौन-सी चीज है, जो उन्हें खुशी देती है?’’ यदि उपर्युक्त सभी या कोई एक भी तत्व आपको खुशी देती है, तो उसको अपने जीवन में आजमाना व उतारना चाहिए। वैसे खुश रहने का इससे अच्छा और उपयोगी मंत्र कोई और नहीं है। यह आपके जेहन में है, जिसे आपको आत्मसात करना चाहिए। दुनिया के सफलतम और सर्वाधिक अमीर शख्सियतों में-से एक बिल गेट्स का भी यही मत है। वे भी प्रसन्नता को जीवन में अहम मानते हैं।
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