चलते रहना है Poem by Pranay Kumar

तुम्हें न दौड़ना है, न रुकना है,
बस चलते रहना है, रास्ता अभी बाँकी है ।

तुम्हें न डरना है यह सोच कर कि आगे क्या होगा ?
बढ़ते रहना है अपनी मंजिल की ओर, तुम्हें कुछ न भी मिला तो क्या ? तजुर्बा पाना अभी बाँकी है ।

बहुतों ने बहुत कुछ कहा होगा तुम्हें, बहुतों को कहना अभी बाँकी है।
तुम्हें भी दिखाना है उन्हें कि, उन्हें कुछ देखना
अभी बाँकी है ।

हँसते होंगे लोग तुम पर , और भी हँसना बाँकी है ।
तुम्हें भी बताना है उन्हें कि, उन्हें खुद पर हँसना अभी बाँकी है ।

तुम्हें न दौड़ना है, न रुकना है,
बस चलते रहना है, रास्ता अभी बाँकी है ।

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