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अग्निपथ-शनि-त्यागी

तू अग्नि पथ पर चल रहा तू सत्य को संभाल चल
देखना हैं तू डर न जाये असत्य की दहाड़ सुन
तू अग्नि पथ पर चल रहा सत्य को संभाल चल
तू सत्य की पुकार हैं असत्य का संघार हैं
तू काल हैं त्रिकाल हैं अधर्म का संघार हैं
अभी का जो अधर्म हैं धर्म से बिकराल हैं
तू धर्म पथ पर चल रहा। अधर्म को पिछाड़ चल
तू सत्य पथ पर चल रहा सिंह के समान चल
तू सत्य की पुकार हैं तू सिंह की दहाड़ हैं
अधर्म का ध्वज जो हैं वो नभ में हैं इतरा रहा
सत्य का जो चिन्ह हैं जंग ही खा रहा
तू सत्य को संभाल चल असत्य को उखाड़ चल
तू धर्म हैं तो सत्य हैं तू शिव का ही तो शस्त्र हैं
तू अग्नि पथ पर चल रहा सत्य को संभल चल
………… ~ Er. शनि त्यागी

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