बेटी-एमडी हिफज़ुर रहमान

बेटी-एमडी हिफज़ुर रहमान

अपने ही घर में बेटियां लाचार क्यों?
मां बाप के दुकान में बेटियां बेकार क्यों?
एक बेटी की जिंदगी से व्यापार क्यों?
इस तरह बेटियों पर अत्याचार क्यों?

कहीं पर शोषण का बाजार,
तो कहीं दरिंदो का शिकार,
कहीं मां के गर्भ में मारी जाती,
तो कहीं होता बलात्कार।

झुठे वादे कर कहीं शादी को लुभाया,
तो कहीं जिंदा बहु को जलाया,
आज बेटी से ऐसा व्यवहार क्यों,
इस तरह बेटियों पर अत्याचार क्यों?

अपना घर छोड़ दुसरों का घर सजाती है बेटियां,
मां बाप को छोड़ दुसरी जगह बस जाती है बेटियां,
फिर भी दहेज के लोभियों की लालच तो देखिये,
टीवी, फ्रिज,गाड़ी के तड़पाई जाती है बेटियां।

कहीं मां का किरदार बखुबी निभाया,
कहीं बहन के रुप में भाई को हंसाया,
बाप को जन्नत का रास्ता हैं दिखाती,
कभी पति के मुसीबत का हल खुद को बनाया।

ऐसी बेटियों से दुराचार क्यों,
बेटियों का उजाड़ता है कोई संसार क्यों,
इन बेटियों पर कुछ तो रहम करो रहमान,
इस तरह बेटियों पर अत्याचार क्यों?

 

एमडी हिफज़ुर रहमान

शतरती, गया ,बिहार

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