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छनभर का एहसास – पूजा कुमारी

छनभर का एहसास ना जाने कैसे होने लगता है|
कभी टुटता है तो कभी जुटता है पर यह एहसास
हमे याद दिलाते हैं|
कोयला के खदान मै से जब हीरा मिल जाता है|
तो वह पल हमेशा याद रहता है ओर वही हीरा
कोयला वन जाता है तो वह पल छनभर का हो
जाता हैं|
आँखे लंब हो जाते है | यह इंतजार करके की वह पल
कब आएगा| जब अपना पल अपना हो| वस रूक
ना जाएँ ये छनभर का एहसास यही दुआ ना करे|
छन मै कोई चिज मिल जाएँ| ओर छन मै वह चिज
खो जाएँ तो वह पल हमे रूलाते है|
हम सोचते है की कभी यह पल छनभर का ना हो
जाएँ| यही हमे एहसास दिलाते हैं|
छनभर का एहसास कभी हमे खुशी तो कभी गम
देते है| पर हमे कभी इस पर से बिश्बास नही हटाना
चाहिएँ| पता नही कब यह पल छनभर मै अपना
हो जाएँ तो।

Pooja Kumariपूजा कुमारी
समस्तीपुर बिहार

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Pooja Kumari

Pooja Kumari

मैं पूजा कुमारी समस्तीपुर बिहार की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

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