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गांधी जयंती पर लिखी कविता-कवि दुर्वेश सिंह

‌भाइयों है गुजरात राज्य में ,नगर पोरबंदर सुंदर l
जन्मे मोहनदास बहा थे,दिन था वह 2 अक्टूबर ll
हुई सुदेश की शिक्षा पूरी ,फिर मोहन थे गए विदेशl बैरिस्टर बनकर गांधीजी ,लौटे वापस देश ll
देखें यहां गुलामी के दिन, मचा हुआ था हाहाकार l
धन वैभव का जीवन त्यागा ,गांधी बने देश आधारll सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा ,टकराई गोरी सरकार l गांधी के हाथों में थे बस ,सत्य अहिंसा दो हत्यार ll किया साइमन का विरोध फिर, तोड़ा नमक कानून आंदोलन भी l
चल पड़ा उनके पीछे जाकर ,भारत का जन जन जीवन भी ll
टूट गई फिर शक्ति विदेशी , भारत छोड़ गए अंग्रेजl
आजादी आने वाली थी ,खुश था सारा देश ll
किंतु उसी समय उस संध्या सभा में ,उठी खून की आंधी l
30 जनवरी 48 को ,स्वर्ग सिधारे गांधी ll
गांधी के सीने पर थी तब ,नाथू ने दागी गोली l हाहाकार मचा भारत में ,भारत की जनता रोलीll
जन जन के थे प्यारे बापू ,करते थे वे सबको प्यार l
इसीलिए बाबू कहलाए ,पिता समान सभी को प्यारll
Durvesh singh दुर्वेश सिहं

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