जागूं -जितेंद्र शिवहरे

जागूं -जितेंद्र शिवहरे

जागू घर की छत पे सारी रात मैं
चांद सितारों से करूं बात मैं
दिल में आके दिल का कोई हो गया
हो न जाऊं पागल इन हालात में।

जागू घर की छत पे सारी रात मैं•••

शहर में हल्ला हो गया मुझे भी प्यार हुआ
दीवानों का कम इंतजार हुआ
ऐसे कैसे दे दूं दिल खैरात में
हो न जाऊं पागल इन हालात में।

जब से अपना कोई मुझको मिल गया
चेहरा दिल बदन सब खिल गया
कैसे बिन गुजारू उनके रात मैं
हो न जाऊं पागल इन हालात में।

जागू घर की छत पे सारी रात मैं•••

बाहर घर से निकलना मुश्किल हो गया
दिल का दिल से मिलना मुश्किल हो गया
रोकू कैसे बेकाबू जज्बात मैं
हो न जाऊं पागल इन हालात में।

जागू घर की छत पे सारी रात मैं•••

शादी सबकी हो चुकी मेरी भी हो
कच्ची कली फूल हो चूकी ओ छोरीयों
खो जाऊं मैं अपनी सुहागरात में
हो न जाऊं पागल इन हालात में।

जागू घर की छत पे सारी रात मैं•••

 

 

     जितेंद्र शिवहरे

चोरल ,महू, इन्दौर

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