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मतदान करे चलोऽ( अंगीठी लोक नाट्य गीत)-सोनी-कुमारी

मतदान करे चलोऽ…..!

मतदाता भाई-बहन :-…… (पहला मुखड़ा)….

चलोऽ हो भैया मतदान करे चलोऽ
बहन- बहनोई, अरोसी- पड़ोसी और
रिश्तेदारों क भी जागरुक करते चलोऽ..
चलोऽ हो भैया मतदान करे चलोऽ….

अपनों मत होतेऽ,
सरकार चुनबै,
अपनों पसंद के नेता बनैबे…
देश चलैतेऽ जे ईमान से,
ओकरे वोट देबै शान से,
एक मत के बहुत मोल छै,
देश हमर अनमोल छै,
बीके ना देबै स्वाभिमान के,
चलोऽ हो भैया मतदान करे चलोऽ…..!

छोटा बच्चा ( दूसरा मुखड़ा) :-…….

“- ये हो काका ये हो बाबा,
की हो छै मतदान हो?
कहा हो छै मतदान हो,
हमु ना सुनले छीये हो,
कबो स्कूल न गेलियो हो,
की नेता पढ़ैते हो?
सुने छीये स्कूल में बड़ा पढ़ाई हो छै हो,
एक दिन पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बनेला छै हो,
छै इहे बात ता हमहु वोट देबै हो…
हमरो दा तनि ज्ञान हो….
इ कि होय छै मतदान हो…?

(मतदाता भाई-बहन) :-….

ऐ बुचिया, ऐ बबूआ सुनला का हो ला मतदान हो,
जेकरा से चले देश हमर,
हो हमर पहचान हो,
जे से बनाई आपन नेता,
सुदृढ़ – सम्पन्न आपन हिन्दुस्तान हो,
ऐ बुचिया ऐ बबूआ सुनो ल…
स्कूल हो छै ज्ञान के भण्डार हो,
जहां न होई जात – पात,
बराबर मिले सबका सम्मान हो,
तु हू पढ़ो, आगे बढ़ो,….
अभी तोहर उमर नाहि होले हो,
18 बरिस के होइह त,
बन जहियो जिम्मेदार इंसान हो,
तब त हू अपान वोट के ताकत अजमैहियो हो…!
अब चले छीयो बबूआ लेट होय छै,
मतदान केंद्र पर बारी – बारी सबके चेक होय छै,

सुनो हो भैया एक बार फिर से सुन ला,
ऐसन नेता चुनिहो हो,
हो कर्मठ ईमानदार हो,
जे ना करी भ्रष्टाचार हो,
नारी – पुरुष मे जे नै करे भेद हो,
बराबर काम दे सबके रहे ना कोय बेरोजगार हो,
सड़क बनाबे हर गली – गली,
जेकरा पर हर लड़की,
हर औरत समाज भी तन के चली,
बेघर के भी घर मिली,
शौचालय दे हर घर-घर मे हो,
शिक्षा पद्धति बदले हो,
शिक्षित कर सके जे हर सामाज के हो,
किसान भाई के भी दे साथ हो,
मरे ना कोई फांसी से,
दे सबके बराबर सम्मान हो,
उठो हो भैया, जागो हो भैया
अईले ऐसन त्योहार हो,
अपने मत से नेता चुनिहो,
बनैहियो देश के महान हो!
चलोऽ हो भैया मतदान करे चलोऽ,
बहन- बहनोई, अरोसी- पड़ोसी और
रिश्तेदारों क भी जागरुक करते चलोऽ..!!

जयमाला सोनी
पूर्णिया, बिहार

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