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गुरु की महिमा-उमेश चन्द यादव

गुरु की महिमा अपरंपार , गुरु लगाएँ नैया पार ,
बिना गुरु का जन- जीवन में , तम का डेरा लगे अपार ।
गुरु ज्ञान से जीवन सँवरे , मिट जाए मन का अज्ञान ,
गुरु ज्ञान की जगमग ज्योति से , चमकन लागे सारा जहान ।
गुरु की पूजा देवों से पहले , कबीरा ने भी किया बखान ,
जिसने जाना गुरु महिमा को , दुनिया में ओ बना महान ।
रखा मान एकलव्य ने गुरु का , अंगूठा उसने दिया चढ़ाय ,
विजयी अर्जुन महाभारत में , गुरु चरणन में सिर झुकाय ।
रखो मान तुम मात – पिता का , गुरु चरणों में रखो ध्यान ,
अनुशासन ना हटने पाये , धन- बल पर मत करो गुमान ।
मानव से नर गुरु बनाए , करनी की कैसे करूँ बखान ,
गुरु ज्ञान से मुक्ति मिलती , अमर पद पाये इंसान ।
सच्चे गुरु का मिलना जग में , मुश्किल सबसे है यह काम ,
उच्चकोटी के गुरु मिलेंगे , मन से दूर करो अभिमान ।
कहें उमेश कवि सत्य मार्ग का , गुरु कराएँ हमको ज्ञान ,
गुरु चरणों में तन- मन अर्पित , महिमा की कैसे करूँ बखान ।

 

उमेश चन्द यादव
बलिया,उत्तर प्रदेश

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Umesh chand Yadav

Umesh chand Yadav

मैं उमेश चंन्द यादव बलिया उत्तरप्रदेश का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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