ख्वाब – पूजा चौहान

ख्वाब – पूजा चौहान

हर जगह बैठे हैं ख्वाबों के पहरेदार
फिर भी हवाओं में फैले हैं सबके ख्वाब |

कोई ख्वाब घुटता है बंद दीवारों में
कोई ख्वाब दिखता है टूटी दरारों से |

कोई ख्वाब सिमटा है गरीबी के बिछौने में
कोई ख्वाब झाँकता है ऊँचे मकानों से |

कोई ख्वाब चुप है समझौते के शोर से
कोई ख्वाब खुश है दिलों की डोर से |

कोई ख्वाब मायूस है खामोशियों की आवाज से
कोई ख्वाब नाराज़ है गुजरे हुए एहसास से |

कोई ख्वाब गुमनाम है भूली हुई बात में
कोई ख्वाब शैतान है भटकी हुई रात में |

कोई ख्वाब बेजान है थमे हुए साँयो में
कोई ख्वाब अनजान है रुकी हुई राहों में |

कोई ख्वाब मेहमान है पल भर की पनाहों में
कोई ख्वाब पहचान है जिंदगी भर की सदाओं में।

Pooja Chauhanपूजा चौहान
हमदर्द नगर, नई दिल्ली

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