लेखकों का परिवार – नेहा श्रीवास्तव

लेखकों का परिवार – नेहा श्रीवास्तव

मेरे शब्दों को भी रहने का मकान मिल गया.
नाम था गुमनाम पहचान मिल गया.
कवियों और लेखकों का परिवार मिल गया.
अपने भावनाओं को कोरे कागज पर शब्दों का रुप देती थी.
कुछ इस तरह साहित्य लाइव का साथ मिल गया.

Neha srivastavaनेहा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश (बलिया)

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