मसला रोटी का-दीप जांगड़ा

मसला रोटी का-दीप जांगड़ा

घर तो उम्मीद छुडावैं भरोशे तो कामयाब करया करैं
छोटी छोटी आँख्यां मैं बड़े बड़े ख़्वाब भरया करैं
कच्ची पाँख देख कै जो उड़ै नही ऊंचाई तै डर ज्या
बड़े बड़े हौंसल्यां नै छोटी छोटी बात बरबाद करया करैं

कोई राज़ी मन तै ना छोड़ै घर बार कदे भी
ना प्रदेशां मैं मिलता मां का प्यार कदे भी
वो मोह भी मनै रूवावै सै मेरी बेबे छोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

हाये भूख डॉलरां की ले आई बाहर मनै
तू नोट छाप रया सै मारैं ताने यार मेनै
कितणे त्यौहार जा लिए मुँह घर का ना देख्या
बाबू की बीमारी का कदे मनै ख़र्चा ना देख्या
घर बार भूल कै बैठ गया मैं क़िस्मत खोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

मेरे दो किलयाँ पै मोहर लगी जब देख देख्या देश पराया
मां बाबू बाहण का मोह त्यागया मैं करण कमाई आया
तनै पेट जै राम बणाणा था करणी थी टाला भूख की
पड़्या तड़फूं वियोग मैं कोई बूझै ना सुख दुख की
घणा याद वो आवै झूला निम्ब की डाहली मोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

आडै किसे टेम फुरसत कोन्या पड़ै बलध की ढाल कमाणा
मेरे अफ़सर आंख दिखावैं सैं जब कह दयूं घर मनै जाणा
छोटी सी बुख़ारी मैं मां तेरा अफ़सर टेम टपावै सै
उसेमैं नहाणा उस मैं पकाणा बैठ उसे मैं खावै सै
मनै याद घणा आवै सै दूध उस काली झोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

लगी आस मुकण नै मेरी मैं माटी हो जाणा चाहूँ सूं
कति आधा गात जा लिया मां तनै छाती लाणा चाहूँ सूं
मनै दीप बता दे नै क्यूकर लिख दयूं आज़ादी नै
दिन आख़री काटै सै इब तो मिल लयूं मेरी दादी नै
क्यूकर मैं भूल गया राह दिखलाया दादा की सोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

अंगार भरे सैं भीतर मैं कद राख़ होंवै जज़्बात मेरे
कदे मर ज्याऊँ आडै सड़ कै इसे हो रे हालात मेरे
किते छुटियाँ का सै रौला पी आर नै भी तो लाचुं सूँ
मां बाप नै उरै ले आऊँ मैं कदे कदे न्यू सोचूं सूँ
फ़ेर ख़्याल आ जावै दबी कर्ज मैं बोटी बोटी का
कोई घर तै लिकड़ कै राज़ी ना सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का
सब मसला रोटी का

 

 

     दीप जांगड़ा

 

 

 

 

 

Deep Jangra

मैं दीप जांगरा कैथल हरियाणा का निवासी हुँ। मैं वीर रस का कवि हूँ।

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