जखम उसने दिया-ओमकांति

जखम उसने दिया-ओमकांति

इतना जखम उसने दिया है जीना अच्छा लगता नही ।
सच्चाई सामने है मुझे कोई सच्चा लगता नही ।
हमको पता है मर जायेंगे एक दिन उनके हाथों से, जाने क्यो हम पीते है उनके जजबातो से। सच्चाई ।
एक पल चैन मिला नही हमको उनके संग मे, दम घुटता है अपनी झूठी उम्मीदो से। सच्चाई ।
उस बेखबर को पता ही नही कि चेहरे पे पर्दा है, अपने लिए तो दर्द भरा है खुश होते है उनके लिए। सच्चाई ।

 

 

ओमकांति

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