तेरी खूबसूरती की तारीफ क्या करु-सुजीत कुमार

तेरी खूबसूरती की तारीफ क्या करु-सुजीत कुमार

तेरी खूबसूरती की तारीफ क्या करु।
चलो दिल से तुझे गुलाब कह दिया

सुख-दुःख में मेरी पलकों का श्रृंगार है जो
मेरी पलकों का तुझे वही आब कह दिया

जिसे पाने की ख्वाहिशें रखती है दुनिया
तुझे वही बेशकीमती ख्वाब कह दिया

लिखे हैं जिसमें हमारे प्यार की दास्तां
तुझे वो प्यार की वो किताब कह दिया

ये इत्तफाक नहीं सब हकीकत है
जो प्यार की दास्तां बेहिसाब कह दिया

तेरे सामने चान्द – तारे सब फिके हैं
ताजमहल से भी तुझे नयाब कह दिया

 

Sujeet Kumarसुजीत कुमार

हलिवन्ता,झारखण्ड

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