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जाग उठी नारी-प्रदीप-निर्मल

जुल्मो को सहते – सहते ऊब उठी नारी
सहन -शक्ति खोकर जाग उठी नारी ।
दुर्गा और काली का रूप धरी नारी
जुल्मो को मिटाने , चल परी नारी
देखना है आज , किस पर चलेगी आरी
नारी हिंसा , बहू हत्या , रेप हुआ भारी
चंडी का रूप धर, निकल पड़ी नारी ।
अत्याचार सहती है , सीता बनकर नारी
चंडी का रूप धर निकल पड़ी नारी
जुल्मो को मिटाने चल पड़ी नारी ,
जुल्मो को मिटाने चल पड़ी नारी।

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