उस परम आनन्द को पाने का रास्ता-गुंजेश शर्मा

उस परम आनन्द को पाने का रास्ता-गुंजेश शर्मा

इस बात को समझने के लिए कुछ प्रश्नों का उत्तर जान लेना बहुत ही आवश्यक है।
आखिर खुशी ही आनंद ही हमे क्यों चाहिए?
संसार मे जितने भी लोग ,पशु,पक्षी,जानवर सभी का मकसद एक ही है खुश रहना ! जाने या अनजाने में।
बस एक ही मकसद खुश रहना आंनद रहना।
भले ही हम इस बात का कभी ध्यान न दिया हो।
नास्तिक,आस्तिक,पापी,मूर्ख,ज्ञानी सब बस खुशी चाहते है

एक आस्तिक आदमी मंदिर ,मस्जिद,चर्च जाकर खुश होता है।उस आनंद को अनुभव करता है।
तो कोई नास्तिक बिना भगवान को माने ही खुश रहता है। एक ज्ञानी इंसान बहुत सोच समझकर बुद्धि से ये फैसला लेता है कि आखिर हमें वो करना है कि जिससे आगे हमे कोई दिक्कतों का सामना न करना पड़े और हम आगे खुश रहे।
एक मूर्क व्यक्ति भी बहुत तरह से अच्छा या बुरा काम करता है क्यों क्योंकि खुश रहे।
आखिर सभी बातें ये स्पष्ट करती है कि इंसान को खुशी ही चाहिए।
तो कर्म और बुद्धि दोनों का एक सीमित लक्ष्य है । बस आनंद को पाना। आनंद तक पहुचना।

कोई इंसान डाक्टर, अभियंता,वैज्ञानिक, बनता है क्यों, क्यों कि उसमें उसको उसका कर्म खुशी देगा। कोई ज्ञान पाने को पागल है क्यों क्योंकि उसका पागलपन उसको खुशी के लिए अपनी और खिंच रहा है। सभी लोग आजाद रहना चाहते है क्यों क्योंकि आजादी का भी मतलब खुशी से है।

कभी -कभी हम अपने कर्म को बुद्धि से जोड़कर उसको त्याग और संघर्ष का नाम दे देते है। क्योंकि हम बस वही तक देख पाते है। बस हम त्याग इसलिए ही करते है कि हम अपनी खुशी अब खुद को न देकर किसी और को देना चाहते है।
उदहारण से देखे तो— एक प्रेमी कोई सालो भर अपनी प्रेमिका के साथ रहता है ,फिर जब उनदोनो के बीच शादी की बात आती है तो वो कहते है कि नही मेरी मा न माने गए उनको खुशी नही मिलेगी। हम अपने इस प्यार को त्याग सकते है लेकिन माँ को खुश रखेंगे।
अब हम सिर्फ त्याग देखेंगे। लेकिन ये त्याग सिर्फ इसलिए कि हम किसी दूसरे को खुश करना चाहते है।
फिर सारी बात गोल गोल घूमकर खुशी पर ही आकर रुक जाती है।

इन सभी बातों से अब स्पष्ट होता है कि बस खुशी और आनंद ही सब कुछ है।
फिर प्रश्न आता है !

द2) यदि हमने आनंद पा लिया खुशी मिल भी गयी तो ये खुशी लेगा कौन?
आनंद हम इन्द्रियों को देते है चाहे वो हमारा मन हो ,हमारा,कान हो,हमारा नाक हो,हमारा मुँह हो या हमारी आंखे हो।
कोई अच्छे अच्छे मिठाई खाकर खुश होता है।
कोई अच्छे अच्छे शब्द पढ़ कर ज्ञान पाकर खुश होता है।कोई किसी की बाते सुनकर खुश होता है। कोई किसी को किसी चीज़ को देखकर खुश होता है।
तो एक खुशी तो ये है कि जो हम अपने शरीर को देते है।
और भी एक केंद है जिसको हम खुशी देते है वो है आत्मा।
तो हम खुशी दो चीज़ों को देते है एक शरीर को और दूसरी आत्मा को।
अब फिर प्रश्न उठता है कि

कोई कहे हम तो मूर्ख आदमी है जी आत्मा क्या है मुझे क्या पता ,ये है भी या नही।

3) आत्मा क्या है??
आत्मा को शब्दों में बताना मुश्किल है लेकिन इसको अनुभव से समझना आसान है।
जिससे आपको एक संकेत मिल जाएगा कि एक और भी केंद्र है जिसको खुशी चाहिए।

आपको ज़रूरत है प्यार की।
आपको हर इक चीज़ से पहले खुद को जोड़ना पड़ेगा ।
आप जब इस काबिल बन गए कि आप किसी से प्यार कर सकते है आप प्यार करते है तो आप को ये अनुभव होगा।
जैसे आपकी कोई प्रेमी हो और वो आपसे हज़ारो मिल दूर हो और आप न उसको देख पाओ न सुन पाओ ।
फिर एक उसका ख्याल आपके मन मे आने पर एक मुस्कुराहट और एक आनंद का अनुभव होगा ।
जहाँ आपकी न कोई आंखे ,न कान ,न मुँह कोई भी भौतिक शरीर आपका कार्य न करे फिर भी आनंद।
ये है आत्मा की झलक।
बस झलक ही ।
कृष्ण गीता में कहते है।
आत्मा आध्यात्मिक (spiritual) है ।।

आज सभी लोग प्यार कर रहे है फिर भी सब बेहोसी में कर रहे है किसी को आत्मा नाम की खबर नही है।
क्योंकि सारा प्यार अब भौतिक शरीर पर आ चुका है।
लोग अगर प्यार करने के बाद भी आध्यात्मिक (spiritual) नही होते तो समझिए कि उनका प्यार, प्यार नही ढोंग था ढोंग से भी नीचा था ।
क्योंकि जिसने एक बार आत्मा को अनुभव कर लिया है वो फिर कभी अपनी भौतिक शरीर को खुश करने से ज्यादा खुश अपने आत्मा को करना चाहेगा।
क्योंकि शरीर तो बहुत छोटा है। इस छोटी चीज़ के लिए कोई खुशी क्यों दे जब इसको कुछ और बड़ा मिल गया है तो।

तो अब हमने आत्मा को भी महसूश कर लिया है।
अब ये
अंतिम प्रश्न उठता है कि आखिर।।

ये खुशी हमको आत्मा को देनी है या शरीर को।
अगर किसी को भी देनी है तो क्या है इसका रास्ता??
क्योंकि यहाँ हम सभी जानते है कि हम बस जीते है खुश रहते है ,लेकिन आनंद नही मिलता।
और खुशी मिलती भी है तो सुबह मिली शाम को खत्म।
क्यों?
आहिर कोई तो रास्ता होगा जहाँ हमे हमेशा के लिए खुशी मीले।।

इसका उत्तर आपको मेरे नए अगले ब्लॉग में मिलेगा।।।।

                           

 

                गुंजेश शर्मा

           मुजफ्फरपुर ,बिहार

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