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ना गुरु रहे ना ज्ञान रहा, कलयुग का आज्ञान रहा, ना अच्छी लगती हैं लोगों को, धर्म, कर्म की बातें, बस पाप का भार बढ़ रहा । read more >>
कविता-मन की मार बन अभिशाप जगत में बेटी मैं छिप कर क्यों जीवन जीती किसे सुनाऊं कौन सुनेगा किससे दिल की बात कहूं मैं? read more >>
असहाय मुझे अपने आप को खो दिया दैनिक आंखों के सामने खो गया परिचित दुनिया मुंह चावल मुंह की आवाज खींची जाती है जो तय नहीं करता है उस read more >>
जिंदगी के रास्ते भी बड़े अजीब हैं, कभी हार कभी जीत लगी रहती हैं, हर कदम पर खुद संभाले रहना, रास्ते में ठोकरें भी लगती हैं। read more >>
मैंने कब कहा कि तूने छोड़ दिया मुझे, मिलना न मिलना सब नसिबों कि बात हैं| ज़िन्दगी में सब कुछ मिल जाये ये ज़रूरी नहीं रजा, मिला तो वो भी नहीं � read more >>
*नर पर भारी नारी* अक्ल बाटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारी। सभी आदमी खड़े हुए थे, कहीं नहीं थी नारी।। सभी नारियाँ कहाँ रह गई, read more >>
चाहे वर्तमान युग हो चाहे बीत गया कल हो या आने वाला पल हो। हर कर्मफल अपने आप से अलग हो ये जरूरी नही है। कहा कब क्या सिमिलाॅरिटि होती है । read more >>
यहाँ कौन किसको सलाम करता है यहाँ मतलब सबको करीब रखता है जिस जहाँ में तुम हो वहाँ मैं भी हुँ मेरे दोस्त वक़्त आने दो वक़्त तो सबका हिसाब क� read more >>
आज तुमने वो बात याद दिला दी हैं जिसे ज़माने लगे थे मुझे भुलाने में चलो शुक्रिया तुम्हारा उस याद को याद दिलाने के लिए मैं फिर से मशरूफ ह� read more >>
मेरी कमी क्या तुझको खलती है मेरी याद क्या तुझको कभी आती है मै क्या तेरे ख्यालों मे आती हूँ उस पल की याद आती हैं जो प्यार भरे थे उन एहसास read more >>
देखिये कब उनसे मुलाक़ात होती हैं. अभी तो बात बंद हैं कब बात होती हैं. रिश्ते निभाना इतना आसान नहीं मेरे दोस्त कभी कभी जहर भी बर्दाश्त कर read more >>
इस ज़माने में तेरे नाम से बदनाम मैं क्यों कुसूर तो तेरी नज़र कि थी फिर भी खताकार मैं क्यों बहुत वक़्त लगे मुझे इस बात को भुलाने में खता दो� read more >>
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