कोई लौटा दे वो दिन ,
जिसमें खेला था मेरा बचपन।।
चू -चू कर चिड़िया आती थी,
बिखरे दाने चुन -चुन आंगन से खाती थी।
मैं दौड़ कर उन्हें पकड़ा कर read more >>
1) वक्त - वक्त की बात हैं ज़नाब !
जिनकी नजरें अक्सर ढूंढा करती थी मुझको,
अब वो नजरें फेर लिया करती हैं ।
2) आजकल आतंक की दीवारें ढाह रही हैं स� read more >>