रात हो चुकी थी और मैं बहुत गुस्से में था ।इस कोरोना ने बहुत हद कर दी है ये कहकर चिल्ला रहा था।
पापा ने समझाया कि लॉक डॉउन में ईश्वर की रज� read more >>
नियति का न कोंई तोड़ !
नियति जब खोले पोल !!
हवस की गठरी भर नहीं पाए !
कर्म की लेखी मिट नहीं पाए !!
कर्म के जैसे बीज लगाए !
फूट के वो ही बाहर आए read more >>
//...कोरोना उपरांत...//
बीत रहे अब ,
दुख और भय से ,
अवसाद भरे दिन,
टूट रही है कड़ी ,
दूसरी लहर की...!
धीरे-धीरे ही सही,
फिर से रौनक लौट
रही है मे� read more >>
अच्छे अच्छे को ख्वाब दिखा देती है ,
धन-दौलत भी क्या है |
पता नही भगवान ने ऐसा क्या बनाया है ,
आज धन-दौलत की दुनिया है ,
अच्छे – अच्छे को चक� read more >>