#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
आता है सच सामने,मंथन जब हो तेज।
और दूध का दूध हो,मन में हो अंगेज।।
आता है सच सामने,वक्त रहे अ� read more >>
नमस्ते दोस्तों 🙏🙏
कहते हैं दोस्तों ! मां-बाप की असली खुशियां उनके बच्चे में होती है ! उनकी मुस्कान , सफलता , तरक्की में होती है ....
पर क्य read more >>
मन रे बेचैन-
तू क्यों है बेगाना,
तोहे न चैन-
बसे क्यों है बेगाना,,
तू रे चंचल-
तेरा न कहीं ए-ठौर रे,
ए-मन-
भटके तीनों लोक बेचैन रे....!!!!
-मो� read more >>
बचपन के वह दिन याद आते हैं, रामलीला देखने की खुशी जब हम बर्दाश्त नहीं कर पाते थे, आज के बच्चे रामलीला देखने क्यों नहीं जाते हैं, टीवी मोब� read more >>