मैंने इस लेख में हर विषय पर बात कि है। तो कृपया यह ना सोंचे के में बार - बार बदल क्यों रही हूँ
जब जिन्दगी और लोग सताने लगे तो समझ जाना अब क� read more >>
सच कहते वो लोग जो कहते थें। कि हर चिज का आनन्द बच्चपन में आता है। एक बच्चपन ही ऐसा है। जिसमें किसी चिज का ज्ञात नहीं होता है। होता तो बस आ read more >>
आज मन कुछ उदास सा है। क्या कहूँ और क्या नहीं पिछे मुड़ कर देखती हूँ तो डर भी लगता है। और अच्छा भी यही बात भविष्य को लेकर है। पता नहीं आगे � read more >>
एक पल नहीं लगता समय बदलने में।
कहीं किसी का आने का जश्न तो कहीं किसी का पल भर में जाने का दुःख।
पल भर में बदल जाती है यह जिंदगी, पल भर में � read more >>
मन भरने लगा है
नाजाने क्यो
जीने से डर लगने लगा है........
अपने हों या बेगाने
सब के अलग - अलग हैं पैमाने
किस - किस का माप समझूं मैं अनाड़ी
जब हर � read more >>