कभी कभी खुद से ही मन यह प्रश्न करता है !
कि आप मेरी जिंदगी में आए ही क्यों ?
जब आपको मुझसे दूर जाना था! मुझे इतनी सपने दिखाए ही क्यों?
जब इन read more >>
(दोहा छंद)
यूं ही हृदय उदास है, दिल में है जो दर्द।
किसे कहूं अब यार मैं, मौसम भी है सर्द।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्� read more >>
(मुक्तक छंद)
हमें मुहब्बत हो गया, तुझ से ही ओ यार।
यादों में तुम ही रहें, मेरे दिल हकदार।
तुझ में ही है जिन्दगी, तुझ में ही दिल जान_
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