आदेश कहाँ...! प्रार्थना विनत करती थी,
मैं भी ज्यों त्यों निज सुख ढूंढा करती थी,
मुझ जैसी भाग्य बली का भी क्या ही कहना,
मौसम कोई भी हो संघर् read more >>
_कभी हँसते हुए छोड़ देती है" ये ज़िन्दगी!!_
_कभी रोते हुए छोड़ देती है " ये ज़िन्दगी!!_
_"न पूर्ण विराम सुख में...._
_"न पूर्ण विराम दु:ख में..._
_बस � read more >>
बिसरी इस , बिखरे विश्वास ...!
बिन बोले , ना कोई जड़ ....
ना कोई शाख ...!
बिन किस्मत , ना ज्यादा ना कम होय ....!
बिन बादल , ना बरसात होय ...!
पीहर ना शोभ� read more >>