सदृण सा इक रिश्ता अब भी निभा रही हूँ ,मैं,।
इस, रिश्ते ,में, बातों का ,दौर खत्म है,।
फिर, भी ,एहसास, न, टूट जाये,।
उम्मीद का आखरी सफर निभा रही � read more >>
जिस दिन मैं पैदा हुई,
उसी दिन दुनिया शुरू हुई थी!!
घर के आंगन में एक नीम का पेड़ था!
वहीं से मेरे जीवन की शुरुआत हुई थी!!
मां नीम पर डाले झू� read more >>