दिल की शाख पे बैठा कोई परिंदा,
हर घड़ी हर पल प्यार की कूँक लगाए।
उड़ जा तू यहाँ से ,मत अपना बसेरा बना,
फिर ना जाने कौन मुहब्बत की हूक जगा� read more >>
तू मेरी नजरों से दूर मत जाना ,
चाहे जो कुछ कहे उल्टा _ सीधा ज़माना ,
मैंने तुझे टूट _ टूट कर चाहा है पगली__
मैंने तुझे सदियों से अपना ही माना read more >>
काश , आ जाए वह मेरी महफिल में मेरे मेहमान बनकर
मैं गले लग जाऊंगी बीच महफिल में उनकी जान बनकर ,
मैंने तो उन्हें नहीं बुलाया जान _बूझ कर __
ग� read more >>