ए शारदा माँ झूठ बोलने की मुझे कला दे दो !
भेद सके न जिसको सच,ऐसा मुझे कवच दे दो !!
सच सुनने की अब, किसी को आदत नहीं ।
सच कहने की अब,जुबां में read more >>
अचंभा क्या है? ताजमहल का
बस तरासे चूना पत्थर ?
शायद नहीं !
किया अजूबा इसे विश्व में ,
भाव छिपा क्या इसके अंदर ?
देखा जब दूर से उस मीनार को read more >>
रोके रुके न नीर नयन से ,राम चले जब छोड़ भवन से
जड़ चेतन हो शून्य चले थे,कुछ कहे कौन हो मूक बने थे
दु:ख को सहे जब दे विधाता,यहां तो मैं ही थी read more >>
कलम में इतनी धार दे !
ऐ माँ शारदे,ऐ माँ शारदे !!
कलम से निकले अलफाज !
वक्त ए हकीकत हो जाए !!
बात में हो वजन इतना !
हर शब्द किताब हो जाए !!
कलम मे� read more >>