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भ्रष्टाचार है सदाबहार::-वीरेंद्र देवांगना

भ्रष्टाचार है सदाबहार::
1956 में मप्र. के पहले मुख्यमंत्री पं. रविषंकर शुक्ल ने जगदलपुर में कलेक्टरों की मीटिंग रखी और सख्त लहजे में निर्देषित किया कि मुझे दस दिनों में भ्रष्टाचार खत्म करनी है।
एक कलेक्टर ने हिम्मत कर पूछा,‘‘सर, शुरू कहां से करना है।’’ यह सुन मुख्यमंत्रीजी तिलमिलाकर तल्ख लफ्जों में जानना चाहे कि कहना क्या चाहते हो?
उस बहादुर कलेक्टर ने फिर साहस बटोरा,‘‘सर, यही कि भ्रष्टाचार खत्म करने की शुरूआत नीचे से, यानी चपरासी, बाबू स्तर से करनी है या ऊपर से।’’
तात्पर्य यह कि भ्रष्टाचार तब भी था और आज भी है। बस वक्त बदल गया है। सत्ताएं बदल गई हैं, चेहरे बदल गए हैं। पार्टिंयां बदल गईं हैं। पर, व्यवस्थाएं जैसी थी वैसी ही हैं।
जब तक कि इसमें बदलाव के लिए जनांदोलन नहीं होता, यह वैसी ही बनी रहेगी। हालांकि अन्ना आंदोलन से यह उम्मीद जगी थी, लेकिन वह भी अपने अंजाम के बिना कतिपय सत्तालोलुपों व स्वार्थी तत्वों के कारण बेनतीजा निकला। कुछ खुदगर्जियों ने इसका बेजा फायदा उठाया और सत्ता-सिंहासन के मजे लूटने लग गए।
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विशेष टीपःः वीरेंद्र देवांगन की ई-रचनाओं का अध्ययन करने के लिए google crome से जाकर amazom.com/Virendra Dewangan में देखा जा सकता है।

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