नागमणि कुमार सिंह 22 Oct 2026 आलेख समाजिक कोलकाता की बस रेस 257 0 Hindi :: हिंदी
आलेख शीर्षक : कोलकाता की बस रेस एक दिन मैं अपनी बच्ची के स्कूल में आयोजित शिक्षक अभिभावक बैठक में भाग लेने बस से केन्द्रीय विद्यालय बालीगंज जा रहा था I अचानक बस ने तेज रफ्तार पकड़ी फिर कुछ दूर आगे जाकर अचानक से ब्रेक लगा I यात्री एक दूसरे से टकराएँI छोटे बच्चे गिर पड़े I किसी को सिर पर चोट लगी तो किसी का बटुआ गिरा I सभी यात्री हल्ला करने लगे I मैं सोच में पड़ गया कि अचानक बस ने तेज रफ्तार क्यों पकड़ी ? तभी पीछे मुड़ कर देखा तो समान नंबर वाली बस हमारी बस के ठीक पीछे खड़ी थी I हमे माजरा समझ में आ गया था I यह कोलकाता कि बस रेस का नतीजा हैं I मैं सतर्क हो गया और सीट के आगे वाली डंडा को कस कर पकड़ लिया I आज कोलकाता कि बस रेस रोज कि दिनचर्या हो गया है I पहले तो बस बहुत धीरे-धीरे चलती है जैसे कोई बैलगाड़ी चल रही हो और सिंगल खाती हैं I तभी अचानक जब सामान नंबर वाली बस आती है तो फिर बुलेट कि रफ्तार से चलने लगती हैं I कभी दूसरे बस में टक्कर मारती है, कभी दोपहिया वाहन को रौदती हैं, कभी राहगीरों को कुचलता है, कभी किसी का हाथ टूटता है तो कभी किसी का पैर टूटता है, कभी किसी कि जान भी चली जाती हैं I समय-समय पर इस तरह कि घटना समाचार पत्रों में छपती हैं I प्रशासन कारवाई करता है लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात जैसी होती हैं I इस तरह कि घटना रोकने के लिए बस ड्राईवर में जागरूकता लाना जरूरी हैं I कमीशन प्रथा खत्म करना जरूरी हैं I लोगों को भी जागरूक होना जरूरी है ताकि बस रेस के चलते भविष्य में किसी की जान न जाय I हम कोलकाता शहर के निवासी से अपील करते है कि हम अपने बच्चों के लिए इस विषय पर आवाज उठाए ताकि भविष्य में कोई बच्चे की जान बस रेस में न जाए I लेखक: नागमणि कुमार सिंह --------------------------------------------------------