संदीप कुमार सिंह 14 Oct 2026 कविताएँ समाजिक #Kavita Jo Ki Doha Vidha Me Kafi Gyan Vardhak Hai.Padhne Ka Mauka Mat Chukiye. 1845 0 Hindi :: हिंदी
#दोहा_छंद रोने से क्या फायदा,आगे की यूं सोच। रहो दूर तकलीफ से, जीवन में हो लोच।। रोने से क्या फायदा,गलती स्वयं सुधार। नये ढंग से बढ़ो,पाओ सब अधिकार।। रोने से क्या फायदा,सच्ची हो मुस्कान। मदद तभी तो है मिले,सुन्दर हो पहचान।। रोने से क्या फायदा,जीवन तो है जंग। टूटे कभी न हौसला,फुर्ती मय हो अंग।। रोने से क्या फायदा,और करे नुकसान। बस बस आगे को बढ़ें,ले लें सबसे मान ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....