Swami Ganganiya 21 Sep 2026 आलेख धार्मिक सर्कल 3146 0 Hindi :: हिंदी
जिन्दगी एक सर्कल की तरह चलती रहती है। जो उससे थोड़ा भी बाहर हुआ। वह जिंदगी से ही बाहर हो जाता है। फिर वह अन्य दूसरे सर्कल या चक्र में परिवर्तित हो जाता है। जहां उसका रूप, आकार आधार अन्य वह सर्कल का प्रभाव निर्धारित करता है कि उसे जिंदगी मे क्या बना है और क्या परिवर्तन होने है या वह इस जीवन चक्र में रहेगा या नहीं। जब वह सर्कल के नियमों से भिन्न या अलग होने के कारण अन्य सर्कल में प्रवेश कर जाता है या चला जाता हैं। माना आज इंसान आधुनिक है टेक्निकल है धार्मिक है या हर इंसान समझदार है पर बात या समझदारी की नहीं है क्योंकि इस सर्कल में ना तो समझदारी काम आती है और नहीं ईमानदारी अच्छाई और बुराई से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता है क्योंकि यहां वास्तविकता भी एक सर्कल के अंतर्गत भ्रम के दायरे में घूम रही होती है। यहां अच्छाई और बुराई हमारे मन और समाज के अहम पहलू हैं जो है निर्धारित करते हैं कि कौन इंसान कितना अच्छा या बुरा है अगर कोई अच्छा कार्य कर्म करेगा तो उसे एक अच्छा जीवन मिलेगा अगर वह बुरे कर्म कार्य करता है तो उसे दुख दर्द पीड़ा से भरा जीवन मिलेगा। यह एक सामाजिक दृष्टिकोण है जो सिर्फ सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण पर ही मान्य होता है बाकी पर नहीं। लेकिन यहां बात जीवन सर्कल की हो रही है कि इन्सान किस प्रकार के चक्र में रहेगा। जीवित या अमृत रूप के सर्कल में जो समाज के आधार पर जीवित और मर्त है जबकि प्राकृतिक रूप में जीवित और निर्जीव का कोई महत्व नहीं है क्योंकि ब्रह्मांड में अनेकों ऐसी प्रक्रिया नियंत्रण चलती रहती है। कौन कब किस रूप में परिवर्तित हो जाए किसी को नहीं पता होता है। जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी चंद्रमा सभी एक सर्कल के तहत चक्कर लगाते रहते हैं। ठीक उसी प्रकार यह सब कुछ एक सर्कल के दायरे के तहत चलता रहता है। यहां कौन कब कहां किस सर्कल में चला जाता है किसी को पता नहीं होता है। स्वामी ganganiya