नागमणि कुमार सिंह 22 Oct 2026 आलेख समाजिक विश्व पशु कल्याण दिवस पर हमारा कर्तव्य 266 0 Hindi :: हिंदी
आलेख
विश्व पशु कल्याण दिवस पर हमारा कर्तव्य
आज हमलोग भूमंडलीकरण और वैश्वीकरण के युग में जी रहे हैं I दुनिया के तमाम देश विकास की दौड़ में आगे रहना चाहते हैं I सब देशों का एक ही लक्ष्य है शहरीकरण, उद्योग को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना है I जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही हैं I पशुओं के प्राकृतिक आवास तेजी से कम हो रहे हैं I जिससे पशुओं की संख्या तेजी से कम हो रही हैं I आज हमारे पशुओं पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा हैं I इसी संकट से बचाने के लिए प्रति बर्ष 4 अक्टूबर को विश्व पशु कल्याण दिवस मनाया जाता हैं I जिसका मूल उदेश्य विलुप्त हुए प्राणियों की रक्षा करना और मानव से उनके संबंधो को मजबूत करना I
पृथ्वी पर प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए पशु-पक्षियों का संरक्षण बहुत जरूरी हैं I बिना पशु के इस धरती की कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं I इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम सुनिश्चय करें कि सभी पशुओं के साथ मानवीय, जिम्मेदार और सम्मानजनक व्यवहार हों I पशु एक बहुत संवेदनशील प्राणी है जो सोचता है, महसूस करता है, उसका अपना व्यक्तित्व और जरूरतें होती है I पीड़ा सहने की भी क्षमता रखते है I हम मानव का जितना अधिकार इस पृथ्वी पर हैं, उतना ही अधिकार इन पशुओं का भी हैं I मानव एक विवेकशील प्राणी हैं I उसे पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों की रक्षा करनी चाहिए I तभी हम मानव अपना अस्तित्व बचाने में सफल होगें I
विश्व पशु कल्याण दिवस मूक और बेजुबान पशुओं के प्रति दया, प्रेम, और मानवीय व्यवहार दिखाने की जरूरत हैं I हमारा लक्ष्य एक ऐसी दुनिया का निर्माण होना चाहिए जहां पशु और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव हो I हमारी खाद्य प्रणाली का मूल आधार हो, जो न्यायसंगत, टिकाऊ, लचीली, और विश्व को भोजन उपलब्ध कराने में सक्षम हो I पर्यावरण के अनुकूल हो I हम उनकी जरूरतों को पूरा करे और वे हमारी जरूरतों को पूरा करे I
हमारा देश जैव विविधता के मामले में सम्पन्न देश है I यहाँ पर जंगल, पहाड़, पठार, मैदान में अनगणित प्रकार की पशु प्रजातियों का घर हैं I भारतीय संस्कृति में भी पशुओं का विशेष महत्व हैं I गाय को हम लोग माता मानते है I धार्मिक और सामाजिक तौर पर भी पशु हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं I लेकिन तेजी से हो रही शहरीकरण, उद्योग को बढ़ावा देना और वनों की कटाई से पशुओं के लिए खतरा बढ़ रहा हैं I आज भारत में कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं I इनके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की सख्त जरूरत हैं I
आज जब हमलोग 21 वी सदी में जी रहे है तब हमे विकास की भी जरूरत है तो पशुओं की रक्षा की भी जरूरत हैं I इसमें हमारा, हमारे समाज, हमारे सरकारें की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं I
पशु कल्याण और हमारा कर्तव्य
पशु कल्याण की शुरुआत हमारे कर्तव्य से जुड़ा एक बिषय हैं I हमारा कर्तव्य होना चाहिए कि हम पशुओं के उचित देखभाल कि ज़िम्मेदारी ले I यदि हम पशुओं से मनोरंजन या कोई काम लेते है तो हमारा कर्तव्य बनता है कि हम पशुओं को पौष्टिक भोजन, उनके स्वास्थ्य की देखभाल, उचित रहने की व्यवस्था करे I उसकी मानसिक स्थिति को समझें और उतना ही काम ले जितना वह पशु करने में सक्षम हों I पशुओं पर अत्याचार न करें और अनावश्यक पीड़ा न दे I सिर्फ हम यह कार्य न करे, समाज के लोगों को भी ऐसा करने के लिए जागरूक करें I लोगों को पशुओं को गोद लेने और उनके अधिकारों के प्रति आवाज उठाने के लिए प्रेरित करें I जिससे पशु भी वहीं जीवन जी सके जिसके वे हकदार हैं I हमलोगों को यह निश्चित करना होगा कि पशुओं की ह्त्या और क्रूरता हमारे समाज में नहीं होनी चाहिए I तभी हम अपने, अपने बच्चे और आने वाली पीढ़ी को एक उज्जवल भविष्य दे सकते हैं I
पशु कल्याण और हमारा समाज
आज भी हमारे समाज में बहुत सारी कुरीतियाँ मौजूद हैं I जिसके कारण रोज बलि के नाम पर बेजुवान पशुओं की हत्या हो रही हैं I इसके प्रति समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत हैं I स्कूल और कॉलेज में ही बच्चों को पशुओं के प्रति दया, प्यार, सहानभूति दिखाने की प्रेरणा देने की जरूरत हैं I हमारे स्कूल और कॉलेज समय-समय पर इस विषय के साथ निबंध प्रतियोगिता, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन कर सकती हैं I जिससे हमारे बच्चों में पशुओं के प्रति नजरिया बदले I आज बहुत सारे पशु कल्याण संगठन घायल और बेसहारा जानवरों के लिए बचाव व चिकित्सा शिविर लगाते हैं I जो आज के समय की माँग हैं I ऐसे संगठनो को बढ़ावा देने की जरूरत हैं I विश्व पशु कल्याण पखवाड़ा भी मनाने की जरूरत हैं I तभी हम एक उन्नत समाज का निर्माण कर सकते हैं I
पशु कल्याण और हमारा सरकार
हमारा कर्तव्य और हमारे समाज के कर्तव्य के अलावा भी हमारी सरकार को इस बिषय पर गहन विचार करने की जरूरत हैं I हमारी सरकार ने इस बिषय पर अनेक पहल की है I पशु क्रूरता निवारण अधिनियम- 1960 के तहत पशुओं पर अत्याचार करने वालों को दंडित किया जाता है I पशुओं के प्रति किसी भी तरह के क्रूरता जैसे अत्यधिक भार ढोना, भूखा रखना आदि अपराध माना गया हैं I इसके बाद हमारी सरकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 लाया था I भारत सरकार द्वारा लागू यह कानून वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है I इसके तहत कई राष्ट्रीय पार्क, वन्यजीव अभयारर्ण्य और संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई हैं I जहां वन्यजीव सुरक्षित रह सके I इस कानून के अंदर संरक्षित और संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची तैयार की जाती हैं I जिनकी रक्षा के लिए सरकार विशेष प्रबंध करती हैं I
हमारी सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना की शुरुआत की है जिसका उद्देश्य देशी गाय/ भैस/बकरी की नस्लों को सुधारने और उनके संरक्षण करना हैं I देशी नस्लों की रक्षा करना और दूध उत्पादन को बढ़ावा देना है I इसके दायरे में गोशालाओं और गोवंशों की देखरेख के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं I
इसके अलावा हमारी सरकार समय-समय पर औचित्य निरीक्षण भी करती हैं I ताकि उपरोक्त कानून का पालन सुनिश्चित हो सके I पशुपालन विभाग समय-समय पर जागरूकता के भी कई कार्यक्रम चलाते हैं I जगह-जगह पर पशुओं के लिए अस्पताल भी खोले जा रहे हैं I पशुओं के उन्न्त नस्ल के लिए शोध कार्य भी हो रहे है I आज जब हम 2047 तक विकसित भारत का सपना देखते है तो हमारे पशुओं का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहेगा I इसे संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए हमारी सरकारें को और बेहतर प्रयास करने की जरूरत हैं I
प्रकृति और मानव का जन्मजात से एक अटूट रिश्ता रहा है I हम एक दूसरे के पूरक है I उसी प्रकार हमारा और पशुओं का एक अनमोल रिश्ता हैं I हम एक दूसरे के बिना अधूरे हैं I लेकिन हमारा कर्तव्य अधिक हो जाता है क्योंकि हम एक विवेकशील प्राणी हैं लेकिन पशु बेजुवान हैं I वह महसूस तो कर सकते है लेकिन बोल नहीं सकते है I इसीलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम पशुओं के साथ दया, प्रेम,और सहानभूति का भाव रखे I जिससे वे संरक्षित भी रहे और सुरक्षित भी रहे I हमारा पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे और हमारा अस्तित्व भी बचा रहे I आने वाली पीढ़ी के लिए हमलोग एक उज्जवल भविष्य का दरवाजा खोल सकते हैं I हमारा भी विकास होगा, समाज भी उन्नत होगा, और अंत में हमारा देश भी विकसित होगा I
लेखक : नागमणि कुमार सिंह
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