मानवता का अप्रतिम उदाहरण...
कल बाज़ार में फल खरीदने गया, तो देखा कि एक फल की रेहड़ी की छत से एक छोटा सा बोर्ड लटक रहा था, उस पर मोटे अक्षरों read more >>
बचपन
"अब साफ़ आया?
नहीं झर झर आ रहा है...
थोड़ा सा और टेढ़ा कर
हाँ हाँ अब ठीक है
आजा अब नीचे...."
हर घर की छत की "एंटीने वाली कहानी" है ये
सारे HD च� read more >>
*अनोखा मिलन*
शरारत की भी सीमा होती है...
पता नहीं कोई हया लिहाज नहीं है इनमें...
तीन वर्षीय अनीश को गोद में उठाए सीमा बड़बड़ाती हुई बालकनी स read more >>
बेटियाँ...
बाबुल के घर से चली जाती है...
ये बेटियाँ बहुत सताती हैं...
फिर कहाँ लौट करके आती है...
ये बेटियाँ बहुत सताती है...
लोरियां गा के म� read more >>
किसी को पता ही नहीं जाना कहां है और कहां जा रहे हैं... "धरमा"
इतनी भीड़ है शहर में खो जाने का डर लगा रहता है
इसलिए तो मैंने जंजीर बांध ली खु read more >>