अपनी दुनियाँ मे, कोई ,कैसे ?
गुम ,हो गया ।
खुला था ! आसमाँ , देखते-दखते .वो सितारों को सो गया।
अपनी दुनियाँ...........
जाने कैसे ? बदला वक्त ज़िन� read more >>
सरहदे ,बंदिश बनी है।
आज,तब - जब
निभानी थी। मुझे, एक रस्म ,
संसार की,
जो जोड़ देगी ,किसी दिल से
मुझे
अभी ,कुछ है ।
जिन्दा बची, ,ख्वाईशे मे� read more >>
सवाल........,?
पुछती. कमजोर निगाहे.
आखिर ,क्यों ..... ?
ज़िन्दगी को योही ,
ये दर्द देना था।
क्या ,सूरज की तपन मे
हमने पसीना नही बहाया।
सघर्ष तो ,� read more >>