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Uday singh kushwah

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My Articles

मुझे मालुम है, ले वैठी होगी, किसी नदी के किनारे, नाव जीवन की। प्रतिक्षा होगी वस, जीवन साथी की, आते ही उनके नाव चल देगी...। अनचाह� read more >>
साख पर नव पल्लव लग आये, नभ मेंं डोले,बादल इतराये, बाग मेंं कोयल कूक सुनाये, सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए। फिर प्रीत का मौसम छाए, पवन बैठ स� read more >>
मेरा चाँद... (शीर्षक) उस मुडेर पर ,पता नहीं क्यों रुका है, मेरा चाँद, क्या उसको घर का पता नही, क्या अपनों के दिल दुखाने की खता तो नहीं? कभी � read more >>
सर्द रात (शीर्षक) पूनम की वह सर्द रात मीठा-मीठा सा-अहसास हृदय में जगाती है। कुनकुनी-सी प्रीत की धूप ,अहसास भर जाती है। अनंत पसरे नभ में read more >>
" "वो सिन्दूरी शाम" ओंस की वो वूंदें तुम्हारी ही तरह लगतीं हैं भींगी-भींगी-सी ... हरश्रृंगार की यह खुशबू भर देती है तुम read more >>
तू...मुझे मिल न पायी, सौभाग्य से...। इसीलिए तो रोज मिलता हूँ,यादों में...। नहीं तो तुम-हम,दूर-दूर होते इस स्वार्थी जमाने में...। read more >>
दूर कहीं...र्पवतों के क्षितिज पर, ठिठका है चाँद चाँदनी के लिए, घोर अंधकार में छिटक रही चाँदनी नव कोंपलों पर शनैःशनैः। पथ की पगडंडियों read more >>
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