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आलेख

सफलता कैसे प्राप्त करे-ममता शर्मा

*सफलता कैसे प्राप्त करे* आज हमारे पास एक ऐसा विषय या सवाल कह लिजिए है जो आजकल हम कई लोगो से सुनते है कि “सफलता कैसे प्राप्त करे”| लोग कहते हमने पढ़ाई भी कर ली कई डिग्रीयाँ भी हासिल कर ली लेकिन हमे सफलता नहीं मिल रही तो हम क्या करे? इसी सवाल पर हम …

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इतिहास-देशमुख इन्द्री सीमित

छत्रपति शिवाजी महाराज का संपूर्ण इतिहास …। शिवाजी महाराज की जय जय जिजाऊ आज हम छत्रपति शिवाजी महाराज को जन्म से लेकर मृत्यु तक देखेंगे। (शिवराय का बचपन) शिवराय का जन्म हुआ था। जीजाऊ का पेट। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शिवनेरी किले पर हुआ था इसलिए उनका नाम शिवाजी पड़ा। क्या आप जानते है? …

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“हिंसा” कभी ‘बहादुर’ नहीं हो सकती-प्रिंस

कहता है, “वीर सैनिक हिंसक नहीं होता।” हिंसक आदमी को होना पड़ता है इसलिए ताकि वह दिखला दे दुनिया को कि मैं बहादुर हूं। इसलिए जो बहादुर है वह हिंसक नहीं हो सकता। इसलिए हमने वर्धमान को महावीर कहा। वीर ही नहीं, महावीर कहा। क्योंकि वर्धमान ने जैसी अहिंसा प्रकट की वह केवल महावीर ही …

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साँझ भरी-आदर्श मिश्रा

साँझ भरी वो साँझ भरी साम थी कौतुहल पंछी करते थे अंधियारा होने से पहले घर आने की जल्दी रहती थी सज जाती महफ़िल रोज शाम बस हँसी ठहाके गुंजा करती निज रोज चौपाल लगी रहती हर तरह की बात सभी करते कुछ बहस हुआ करती कुछ नाराज हुआ करते थे मनोरंजन होता रहता था …

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जनजातियों में पाये जानेवाले विवाह-प्रकारःः-वीरेंदर देवांगना

जनजातियों में पाये जानेवाले विवाह-प्रकारःः जनजातियों, खासकर माड़िया, गोंड, हल्बा, भतरा, मुरिया, दोरला, भारिया, बैगा, कमार, कोरवा, कोरकू, बिंझवार, उरांव, कोल, पंडो, परधान, कोल, कंवर, भैना, बिरहोर इत्यादि जनजातियों में अनेक तरह की विवाह-पद्धतियां प्रचलित हैं। आदिवासी समाजों में सामान्यतः एकलविवाह और बहुविवाह का चलन है। इनके विवाहों में लोकाचार भी सम्मिलित किया गया है। …

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धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का -कवी प्रकाश परितम

धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का! कुत्ता का संदर्भ गलत है। धोबी का कुतका न घर का न घाट का! कुतका का संदर्भ सही है। कुतका का अर्थ मोटा और छोटा डंडा होता, भारत के कुछ हिस्सो में इसे सोंटा या मुँगरा कहते हैं। कुतका का इस्तेमाल धोबी कपड़े को धोने, पीटने …

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नक्सलवादी आंदोलन का बीजारोपणःः-वीरेंदर-देवांगना

नक्सलवादी आंदोलन का बीजारोपणःः वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल प्रंात के नक्सलबाड़ी (आदिवासी) गांव में इस आंदोलन का सूत्रपात हुआ था। इसके संस्थापक सदस्य थे-चारू मजूमदार व कानू सान्याल। चारू मजूमदार कम्युनिस्ट पार्टी से विद्रोह करके आंदोलनकारी बने थे। मजूमदार का उद्देश्य था-जमींदारों व सामंतों के अत्याचारों व ज्यादतियों के खिलाफ लोगों को एकजुट करना। …

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समझ-चंचल-चौहान

कुछ लोग ज्ञान की चीजों को डिलीट कर देते हैं, हंसी मजाक की चीजें हो सेव कर लेते हैं, ज्ञान की चीजें आप को बेहतर बनाने में , आपको समझदारी से जीने में, सबक, जीने की कला, बहुत कुछ सिखाती।

संघर्षों में नित आगे हूँ-कविता-पेट्सहाली

पुनः प्रात सी जागी हूँ, ठिठक कर कभी ,भाग्य के सीने लागी हूँ,। आभा कि प्रकाश पुंज में, मन तितली सा हल्का कर, कभी पीठ पर लदा था ,सामान,गोद में बच्चा लेकर , दबे पैर संघर्षों में नित आगे हूँ,। कूट की नीति नहीं गाती हूँ, इसलिए गरिमा अपनी बेगैरतों से बचाती हूँ,। कोमल से …

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बस! बहुत हुआ बकवास-वीरेंद्र देवांगना

बस! बहुत हुआ बकवास!! देश की राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी 2021 को किसान के वेश में दंगाइयों ने जिस तरह करीब 400 पुलिसकर्मियांे को जख्म दिया; राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया और लाल किले के शान में गुस्ताखी की; वह सर्वथा निंदनीय, अकल्पनीय और अविस्मरणीय है। वह भी उस दिन, जिस दिन देश का …

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देश प्रेमी-चंचल-चौहान

शब्दों के तालमेल को किताब कहते हैं, मेहनत करने वाले को मेहनती कहते हैं, जिन्होंने हमारा देश आजाद करवाया उन्हें महात्मा गांधी कहते हैं।

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