मेरा साथी पेड़ - एक जीवंत संस्मरण
हमारे घर के छोटे से बगीचे में एक बड़ा, हरा-भरा आम का पेड़ था। उसकी जड़ें मानो घर की नींव से जुड़ी थीं। ब� read more >>
आज भी मोती सा चमके दिल की कोठरी में कहीं। आज बस बेबस खड़ा हूँ,
जैसे कुछ रहा ही नहीं। दर्द से थका, हारा मन, अशांत, व्याकुल है आज। भ्रमित जीव read more >>
"मायका".....✍️
"मुझे कभी-कभी ऐसा लगता है,जैसे मर्दो का वास्तविकता में कोई घर नहीं होता,वो जहाँ पहुँचता है,वहाँ घर बनाता है,मगर औरतों का वाप� read more >>
"जिंदगी".....✍️
"जिंदगी एक किताब है,जिसे पढ़ने का मौका सिर्फ एक बार मिलता है, इसलिए पढ़िए और आने वाली पीढ़ी को उस किताब के उतार-चढ़ाव समझाक� read more >>