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ग़ज़ल
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ग़ज़ल
तेरी यादें
आज फिर तेरी यादें आई मेरी जिंदगी मुझे ना जाने किस मोड़ पे लायी। जिसे भुला दिया था, जिसे इस दिल से निकाल दिया था। आज फिर... तन्हाई में उसक�
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सौदा
ग़ज़ल = ( सौदा ) दिल निकालकर हथेली पे रख दिया ! दिल का मेरे उसने सौदा कर दिया !! पैमाना वफ़ाओं का रह गया खाली ! ख़ून ए जिगर भी उसमें भर दिया !!
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वक्त
वक्त के साथ नहीं वक्त का पहचान नहीं रहा वक्त कभी अकेला नहीं वक्त ठहेरता ही नहीं
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दुवां
वक्त गुजरे मंजिल रही खाली खुदा तुही मेरा पेगांम, यू हम ठेहरे मुसाफिर तेरे
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कितना रोना बाक़ी है
रो रो के जिये हैं आज तलक और कितना रोना बाक़ी है अच्छे के लिए होता है सब फिर कितना होना बाक़ी है। इस दुनिया में वो नीर कहाँ जो मन की प्यास
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जरूरत ही नहीं है
कुछ कमी रह गई थी शायद मेरे प्यार में जिसका कभी मैंने इंतजार किया था मैंने हर गली मोहल्ले में अब न जाने क्यों दिल कहता है लौटा दो मे�
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जीवन कहां ठहरता है
संघर्ष भरे इस जीवन पथ पर क्यों इतने हम मौन खड़े हैं कुछ पत्तों के गिरने भर से पेड़ कहां सूखेi होते हैं जीवन में यह पल भी मौसम की तरह �
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जीना चाहती हू
मैं निकल चुकी हूं जीवन के इस पथ पर बहुत आगे तक अब मेरा पीछे मुड़ कर देखना बहुत मुश्किल है मैं टूट चुकी हूं दिल से अंदर तक अब मेरा फिर
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🙏 जय दुर्गा जय हिन्द वत्तन... ✍️
त्तद् धूम, त्तन्नन धूम, त्त्त्त त्त्तथई त्तथई, त्त्तत्त्तथई, त्त्त धिनक त्त् धिन्नन, त्त्त धीन धीन धीनक ध् धीन धीन धीनक, ध् धीन.. धीन.. �
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मेरे देश की धरती
यह मेरे देश की धरती है,मत करो इसे खराब अब बदलना है अपने आप को, पूरे करने है वे ख्वाब देखे थे जो हमने कभी लेकिन छुआ नहीं उसे अगर तुम्हे न�
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ईमान है महंगा
दो वक्त की रोटी से कुछ बढ़के नहीं देखा मुफलिसी ने चांद को जी भरके नहीं देखा ईमान है महंगा मेरा शायद कहीं बिक जाए लेकिन ये सौदा आज तक कर�
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गज़ल
रात अंधेरी है, कोहरा घना है। हर शक्सियत यहां, डरा डरा है। तेरे तवज़ुम सा, करार छा गया । लो मैं ,हुबहुँ आ गया। कैसी तल्खियाँ ये कैसी अद�
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