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अब चुनाव आ गया कौवा सा कांव कांव गांव गांव छा गया लगने लगा है कि अब चुनाव आ गया। पांच साल बाद फिर याद अब आ गया पूछ पूछ ह� read more >>
क्या गीत लिखूँ में तुम पर जो प्यार लुटाये हर प्याले ने बिना ही पथ बतलाये आते है। रोज तेरे प्याले , तू � read more >>
*आंखों से आंसू क्यों निकलते हैं* *रचयिता* *अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर * आंखों से आंसू क्यों निकलते है आत्मा दुखी हो तो आंसू निक read more >>
हे नारी तुम कलयुग में भी धर्म पग पर चलती जाओ, कर्मो से अपने इस जग को, तुम दिव्य स्वरूप दिखाओ l तुम झुको सही,पर रुको नही, यह अद्भुत दृश्य द� read more >>
किस लिए धरा पर आएं हो, किस के लिए धरा पर आएं हो तुम्हारा लक्ष्य ना ओझिल हो जाए व्यक्तित्व ना बोझिल हो जाए माया मोह निंद्रा त्यागो हसी � read more >>
अ अनार के दाने खाओ आ आम मे चूस लगाओ इ इमली की बने खटाई ई ईख की बने मिठाई उ उल्लू को मार भगाओ ऊ ऊन का स्वेटर बनाओ ए एड़ी पर बदन सम्भालो ऐ � read more >>
"जीवन की ठोकर" कोई न देखें मेरे अंदर कितने घावों से भरा हूँ कितनी तन्हाई है मेरे अंदर कितने गांठों से बंधा हूँ जीवन के ठोकरों ने अने read more >>
मैं शांत हूँ तो अच्छा है , और अन्याय सहूँ तो और अच्छा हूँ । कोई उटपुटाँग बोले read more >>
मै परिंदा बेखबर उङू उम्र भर ऐसी ख्वाहिश ए तमन्ना है दुर हो गम दर्द सारे ना हो फिक्र कोई हस्ते मुस्कुराते हुए जीना है खिला खिला गुलश� read more >>
कि गाँवों की गलियो से अपरिचित होगें आने वाले , यह सदीं की झलक बताती कैसे होगें आने वाले । सुख सुविधा � read more >>
कभी सोचता हूँ बैठा दालान मै , कभी सोचता हूँ चलते - चलते मैदान मैं । जीवन मैं श्रम कितना करना होगा , जिनता अच्छा जीवन जीना होगा । read more >>
किस्से बचपन के बड़े अनूठे है बातो-बातो में हम तुमसे रूठे है कुछ पल खामोशी छा जाती थी फिर कुछ पल के बाद खामोशी लुप्त हो read more >>
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