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अगर वक़्त इंसान होता…
अगर वक़्त इंसान होता… अगर वक़्त इंसान होता, तो मैं उससे यूँ ही नहीं मिलता— मैं एक मुक़दमे की तरह उसके सामने अपना दर्द रखता। कहता— “�
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हिंदी स्वरमाला
छोटा अ से अनार सावन की आई बहार बड़े आ से आम रोज सुबह खाओ बादाम छोटी इ से इमली धुआं रोको लगाकर चिमनी बड़ी ई से ईख छोटों से भी मिलती �
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मां
"मां" मां तुम ऐसी कैसी हो?? मां तुम जब सुबह उठती हो। तो उलझे बालों को ऐसे बांधती हो जैसे कंघी करने में न जाने कितना वक्त निकल
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ढूंढते है तो रास्ता मिलता है
ढूंढते है तो रास्ता मिलता है जीवन हो चाहे पूरा बीहड़ या हो फिर घना जंगल ढूंढते है तो रास्ता मिलता है, निष्क्रिय जीवन जीने से क्या कोई �
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भगवान का अनमोल उपहार मेरी मां
मां सुकून है मां जन्नत है भगवान की दी हुई एक मन्नत है । मां भगवान का दिया अनमोल खजाना है उसके सपनों को हमें सजाना है । मेरे पास शब्द न
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*माँ: मेरा संसार*
*माँ: मेरा संसार* जब मैं इस संसार में आया, सबसे पहले तेरा आँचल ही पाया। बोल मैं कुछ भी नहीं सकता था, अभिव्यक्ति भी नहीं दे सकता था। हर �
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बरसात
बारिश के मौसम में महसूस हुई मुझे तन्हाई खिड़की के पास बैठी थी कुछ बंदे मुझ पर भी आई मन में एक अजीब सा ख्याल आया भगवान ने बरसात का भी क्य
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जीवन्मुक्ति का सोपान
समय के महापुरुष की शरण में, जब शीश झुक जाता है। समर्पण की पावन समिधा से, सेवा का दीप जलता है।। श्रवण कर उनके वचनों को, मन का तिमिर छँट�
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*माँ*
दुनिया का सबसे प्यारा नाम है माँ, हर बच्चे की पहली पहचान है माँ। जिसकी गोद में मिल जाता सुकून, थके दिल का मीठा आराम है माँ। खुद भूखी र�
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सब कुछ बोल गई
"वह फिर भी सब कुछ बोल गई" बिन साज श्रंगार किए ही वह मनभावन तरुणी लगती थी चपल नहीं थी शांत भाव में खिली कुमुदिनी लगती थी वह कुमारी सुक�
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उठो धरा को छोड़ गगन को छू लो तुम
उठो धरा को छोड़ गगन को छू लो तुम, उठो धरा को छोड़ गगन को छू लो तुम तुम्हीं एक हो वीर इसे न भूलो तुम किस्मत भी आती है हिस्से में उनके तक�
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पानी पर खिलता कमल हो तुम
"पानी पर खिलता कमल हो तुम" पानी पर खिलता कमल हो तुम कुदरत की लिखी गज़ल हो तुम या हरी भरी प्रकृति में योवन का ताज महल हो तुम या नीले नीले
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