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कविताएँ
अपने गुणों की पहचान खुद करें
अपने गुणों को पहचान कर अपनी काबिलियत पर यकीन रखते हुए अपने ही प्राकृतिक गुणों का विकास करना चाहिए फिर चाहे दुनिया वाले उसे बड़ा कहें य
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दूसरों के खातिर आप अपने अच्छे स्वभाव को ना बदले -जीवन की सीख
हीरे के साथ सोना जहरीला नहीं होता समुद्र विषैले जंतु से विषैला नहीं होता परायो के बीच अपना पराया नहीं होता कटुता के बीच प्रेम अपना स
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कठिन परिस्थितियों में एक ख्वाहिश जरूर रखना
चल अचल दुखों से गुजर कर है कुछ बेहतर काम करना ना कर सके गर कुछ तो कोई गम नहीं बेहतर इंसान बन है रब के दर अपना नाम लिखना। ( Kirti sin
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अश्क तो मोती है।
अश्क तो मोती है। आखो के खुशी हो या गम, पलको से टप-टप, दिल को अहसास , मन मे विश्वास जगाते है। ये कभी हमे प्यार से पास तो कभी दूर ले
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जब कहना था तो
जब कहना था तो कहा नहीं अब कहने को कुछ बचा नहीं मूक था मैं या बना दिया चुप रहना हमें सिखा दिया कहने का अवसर भी गंवा दिया बांध लिया तुमने �
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बूंद की व्यथा
टपक रही नल की बूंदे खुद को सोच रही क्या यही हमारी किस्मत है क्या यह बदलेगी नहीं क्या नहीं गिर सकती मैं किसी के शरीर पर क्या नहीं पड़ सक
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पेड़
जीने के लिए हवा खाने के लिए खाना, कौन ये सब देता है तुम यही बतलाना। गाय भैंस बकरी व घोड़े सब पेड़ खाकर जीते हैं, भूलना मत तुम सेहत हेतु इन�
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सांझ
जिंदगी कड़ी धूप तो छांव है ये सांझ। आकर चुपके से कानों में कुछ फुसफुसाती है ये सांझ। अपनों को साथ बैठाती है तो चाय संग पकौड़े भी खिलात�
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कोरोना या...
काम है न काज है, मिलता नही अनाज है, लॉकडाउन में रह के हमने देखा सबका राज है कुछ ने तो दीपक मोमबत्ती और टॉर्च जलवाया है किन्तु कुछ ने अवस
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विरह-प्रसंग(1-11 दोहे) सुनील कुमार नायक
(1)बैरण बादळी मत बरसै,म्हारौ पिवजी बसे परदेश। पिवजी बेगा आवजो,हिवङै मे करुं कलेश।। (2)सावण सुखो जाय पियाजी,कद आओ म्हारै देस। गौरी त�
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जब वो रूठ जाती है
जब वो रूठ जाती है घुटनों के बल जमी पर बैठकर तिरछी नजर से देख जाती है जब वो रूठ जाती हैं चेहरे को अपने फुलाए हुए नयनों को अपने जमाये हु
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छोटे छोटे क़दमों से
छोटे-छोटे कदमों से हम चले जाएंगे, मंजिल दूर हो चाहे कितनी भी हम पहुंच जाएंगे छोटे-छोटे कदमों से हम चले जाएंगे आएंगी बड़े मुश्किल हाल�
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