...शब्द भेद का गुर जो-
लखे सहजे भवसागर तर जाए...
...सांस चक्कर में जीवन-
घुरत फ़िरे एक आवे एक जाए...
...देह-धाम,मन-मंदिर में-
रमता-राम सुरति चढ़ read more >>
तुम्हारी खामोशियां भी मुझसे कुछ कह जाती हैं
अपने दिल का हाल बयान कर जातीं हैं
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उल्फत में उसकी बड़ा जमाल आया है
कयी अर्� read more >>