चाहे किसी से शुरू करूं,
चाहे किस पे खत्म करूं,,
त्याग एवं प्रेम उन सब पर भारी होगी मां का,
भगवान को भी सोचना पड़ जाएगा तो मां गाथा मैं क्य read more >>
पत्थर को भी बोलने पर मजबूर कर दू, पेड़ को छू कर भी उसका दर्द दूर कर दू. ऐसा हुनर दिया है मेरे राम ने, कि घमण्डी को देखकर भी उसका घमण्ड चुर कर � read more >>
ललचाई आखों से जिस दिन से तुमको देखा है, उस दिन से मेरी जुबा पर बस तेरे नाम की रेखा है, ना भूख लगे ना प्यास लगे ख्वाबो में तुझको निरेखा है, � read more >>