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जब साईं का ठिकाना घट में है-तो मंज़िल भी तन में मिलेगी
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही �
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हम तो पास आने की कोशिश में थे-न जाने बो क्यों दूरियां बनाते गए
एक शिलशिले की उम्मीद थी जिनसे बो फासले बनाते गए। हम तो पास आने की कोशिश में थे न जाने बो क्यों दूरियां बनाते गए। केशव सिंह 📝
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प्यार निभाया नही जाता तो जताया मत करो
प्यार निभाया नही जाता तो जताया मत करो प्यार है मुझसे ये सबको बताया मत करो। झूठी मोहब्बत की कहानियां सुनाए फिरते हो। यूं हर जगह किसी क�
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कैसे-जीवन से कई जुड़े प्रश्नों का उत्तर थोड़ा मुश्किल सा लगता है
कौन हो कहां हो क्यों हो कैसे हो जीवन से कई जुड़े प्रश्नों का उत्तर देने के लिए शब्दों का चयन कर पाना थोड़ा मुश्किल सा लगता है
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तन्हा-भरी महफिल में दिल को यह एहसास हो चला है
भरी महफिल में न जाने क्यों दिल को यह एहसास हो चला है कि मैं अकेला ही अकेला हूं जैसे कोई तन्हा जीवन जी रहा हूं
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चांद से भी प्यारा मुखड़ा है तेरा-मैं देखूं तूझे मेरे श्याम
चांद से भी प्यारा मुखड़ा है तेरा, मैं देखूं तूझे मेरे श्याम, बड़ा गजब लगता है मुस्कुराना तेरा। जय श्री कृष्णा
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इतना बड़ा गुनाह-खफा खफा रहते है वो मुझसे आजकल
खफा खफा रहते है वो मुझसे आजकल.. खफा खफा रहते है वो मुझसे आजकल क्या किसी को टूटकर चाहना भी इतना बड़ा गुनाह हो गया।।
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ईश्वर धरती देश जाति धर्म-सब कुछ एक है ना
"तू कहता है ईश्वर- एक है धरती एक है,,है ना"..! "तो देश-जात और धर्म- सब कुछ एक ही हुआ,,है ना"..!! -मोती
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मेरा तुम्हारा नाता क्या-इस जीवन के खेल में
"मेरा तुम्हारा नाता- क्या इस जीवन के खेल में"..! "देश-धर्म-जात-भेद- क्या इस जीवन के खेल में"..!! -मोती
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कांश मैं समझ पाता-वक्त के हाथों मेरा व़क्त था
कांश मैं- समझ पाता व़क्त को, समझा था व़क्त मेरा था,, मैं था ही बेखबर-इस, व़क्त के हाथों में मेरा व़क्त था..!! -मोती
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हीरा पाया था जिंदगी-समझ पाया न गुर
हीरा- पाया था ज़िंदगी, समझ पाया न गुर,, राह मिला- सतगुरु प्यारे, सीख पाया न गुर..!! -मोती
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आत्मज्ञान में अनुपम उपहार बन जाता जिंदगी
"एक तरफ- निकल जाता, सुख-दुख का चक्कर लगाते ज़िंदगी" "दूसरी- आत्मज्ञान में, अनुपम उपहार बन जाता है ज़िंदगी"..!! -मोती
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