चाहत थी देख लो दिन कैसा होता है रविवार को यह सोचते हुए मैं आ गई इच्छाओं के बाजार में इस दिन से हर दिन कुछ अलग तो नहीं परंतु ऐसा लगता है कु� read more >>
यह गर्मी का दिन भी होता है बड़ा हसीन सा
दिन तो कटते नहीं है रातें भी होती है कुछ हसीन से
रात में छत पर बैठकर चांद को देखा तो वह भी लगा कु� read more >>
मन है आज कुछ उखड़ा उखड़ा था शायद मौसम भी है कुछ रुखा रुखा सा ऐसा लगता है हवाएं टूट गई है जीवन के इस मोड़ पर हवाओं का रुख भी मुझसे मुड़ गया � read more >>
(शायरी)
बड़ी मुद्दत के बाद उन से मुलाकात हुई,
उनके एक शब्द सुनते ही मन कुल्फी सा शीतल हो गया।
फिर तो हसियों की लड़ी में बात चलते रहे,
दोन� read more >>
हम अपना हक उन पर जताने निकले ,
वहां देखा तो वह कमाने निकले ,
छोड़ देते जिन्दगी बसर के लिए ___ हम भी ऐसे उनके दीवाने निकले ।
____ शिव किशोर ,शाह� read more >>